पंडित जयप्रकाश त्रिपाठी
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यही नहीं द्वारका पीठ के शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती भी इनके यजमान बने हैं। इनकी विद्वता की वजह से मंदिर निर्माण के लिए शिलान्यास पूजन के लिए विश्व हिंदू परिषद ने बीस दिन पूर्व जयप्रकाश त्रिपाठी को आमंत्रित किया।
एक अगस्त को विद्वान जयप्रकाश अयोध्या के लिए रवाना हुए। बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शिलान्यास कराया। बड़े भाई सेवानिवृत्त शिक्षक और मझले भाई चिकित्सक अवधेश त्रिपाठी ने पूरे परिवार के साथ पूरे कार्यक्रम को लाइव देखा।
भारत के परम वैभव प्राप्ति के संकल्प के साथ प्रधानमंत्री ने किया पूजन
काशी विद्वत परिषद के मार्गदर्शन में श्रीराम मंदिर के लिए भूमि पूजन संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री ने विश्व में शांति और भारत के परम वैभव की प्राप्ति के संकल्प के साथ भूमिपूजन किया। काशी विद्वत परिषद के मंत्री डॉ. रामनारायण द्विवेदी ने बताया कि बुधवार सुबह 9.30 बजे पूजन आरंभ हुआ।
गौरी गणेश के पूजन के बाद कलश पूजन और पंचांग पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद शिला पूजन हुआ और पांच शिलाएं नंदा, भद्रा, जया, रिक्ता और पूर्णा को रखा गया। काशी से गया चांदी का कछुआ और उसके ऊपर शेषनाग को विराजमान कराया गया है। फिर पंचरत्न डाले गए। वास्तु पुरुष, सर्वोषधि और देश के विभिन्न स्थानों से आई वस्तुओं व रत्नों को डाला गया।
भगवान राम के भूमिपूजन को तीन चरणों में बांटा गया था। तीन अगस्त को पहले दिन भगवान गणेश की पूजा, गणेश अथर्व शीर्ष के पाठ के बाद 1108 लड्डू भगवान गणेश को अर्पित किए गए। दूसरे दिन अयोध्या की परंपरा के अनुसार, महानिशान पूजा संपन्न हुई।
इसमें हनुमानगढ़ी पर हनुमान जी से प्रार्थना की गई कि भगवान राम के काम निर्विघ्न संपन्न हों। इसके बाद रामलला के विग्रह पर वैष्णो संप्रदाय की सबसे बड़ी पूजा संपन्न हुई। काशी विद्वत परिषद की ओर से प्रो. रामचंद्र पांडेय और प्रो. विनय पांडेय समेत दो कर्मकांडी ब्राह्मण भी शामिल हुए।