जिला कृषि रक्षा अधिकारी स्नेह प्रभा ने सोमवार को एक पत्र जारी कर जनपदवासियों को स्क्रब टायफस और लैप्टोस्पायरोसिस से बचाव के प्रति जागरूक किया है। हाल के दिनों में जिले के कुछ विकासखंडों में इन दोनों जीवाणुजनित संक्रामक रोगों के मामले सामने आए हैं।
यह बीमारी मुख्य रूप से चूहों और छछूंदर के माध्यम से फैलती है। बताया कि खरीफ की फसलों की कटाई के बाद चूहे खेतों से घरों की ओर आने लगते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है।
ऐसे में लोगों को अपने घरों, आंगन, खेत और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना आवश्यक है। चेतावनी दी कि चूहा नियंत्रण में उपयोग होने वाले ये रसायन अत्यधिक जहरीले होते हैं। इन्हें बच्चों की पहुंच से सख्ती से दूर रखें और सुरक्षित ढंग से प्रयोग करें।
इन उपायों से बचें संक्रमण से
आसपास का पूरा परिसर साफ-सुथरा रखें।
चूहे के मल-मूत्र की सफाई करें, क्योंकि जीवाणु इन्हीं में पनपते हैं।
-घरों में चूहेदानी का उपयोग करें। चूहे पकड़े जाने पर उन्हें मारकर जमीन में दबा दें।
ब्रोमोडियोलॉन 0.005% मिश्रित बिस्किट की लगभग 10 ग्राम मात्रा चूहों के बिलों में डालकर उन्हें बंद कर दें। इसे खाने के बाद चूहे मर जाते हैं।
जिंक फास्फाइड 80% वीपी मूषकनाशी जिले के सभी विकासखंडों में स्थित राजकीय कृषि रक्षा इकाई/बीज भंडारों पर उपलब्ध है। इसकी कीमत 7 रुपये प्रति 10 ग्राम पैकेट है।