बताया जा रहा है कि पश्चिमी विक्षोभ के बाद शुक्रवार को तेज हवाओं ने हिमालयन रेंज के ठंड को पूर्वी उत्तर प्रदेश तक पहुंचा दिया है। इससे पहाड़ पूरी तरह ठंडे हो गए है और पूरा पर्वतीय वन क्षेत्र भीषण ठंड की चपेट में आ गया है। ठंड से पारा लगातार गिर रहा है और गलन से शहरी, देहाती तथा पर्वतीय क्षेत्रों का जनजीवन पूरी तरह अस्त व्यस्त हो गया है।
ठंड का असर सिर्फ मनुष्यों पर ही नहीं पशुपक्ष्यिों पर भी देखा जा रहा है तथा वे भी सिकुड़ गए है। वहीं नक्सल प्रभावित क्षेत्र के गरीबों की हालात खस्ता है। दो जून की रोटी के लिए रोज कुआं खोदने तथा पानी पीने वाले गरीब ठंड से बेहाल है।उनके सामने अलाव और पुवाल के सिवा कोई विकल्प नहीं दिखता है।
अलाव की आग उनको गर्म करने का सहारा बनी हुई है तो वहीं पुवाल का बिछावन उन्हें राहत दे रहा है। शहरी क्षेत्रों में गर्म कपड़ों की बिक्री के साथ ही गीजर, ब्लोअर की बिक्री भी बढ़ी है।
लेकिन गरीबों को ये सुविधायें उपलब्ध नहीं है तो वे प्राकृतिक संसाधनों के सहारे ही दिन रात काट रहे है।
क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि ठंड का प्रकोप जैसे-जैसे बढ़ रहा है वैसे-वैसे गरीबों की स्थिति खराब होती जा रही है लेकिन परंपरागत ठंड रोकने वाले संसाधन अलाव और पुवाल का ओढ़ना बिछौना उन्हें राहत दे रहा है।