इसी बीच मंगलवार सुबह वीरेंद्र पांडेय, जो स्वयं कुछ समय पहले पैर टूटने के कारण बैसाखी के सहारे चल रहे थे, पत्नी का हाल जानने अस्पताल पहुंचे। बिस्तर पर जिंदगी और मौत से जूझ रही पत्नी की हालत देख वह खुद को संभाल नहीं सके। अचानक उन्हें घबराहट हुई और अस्पताल परिसर में ही दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हो गई।
इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वीरेंद्र पांडेय कोलकाता में रहकर निजी नौकरी करते थे। उनके दो बेटे हैं। बड़ा बेटा कोलकाता में कार्यरत है, जो अस्पताल में रहकर मां की देखभाल कर रहा है, जबकि छोटा बेटा चेन्नई में मर्चेंट नेवी में है। पिता की अचानक मौत से दोनों बेटों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।