हरतालिका तीज भाद्रपद शुक्ल पक्ष तृतीया को मनाया जाता है। कुंवारी कन्याएं इच्छित वर की प्राप्ति एवं सौभाग्यवती स्त्रियों के लिए यह व्रत अखंड सुहाग के लिए व्रत रहती है।
ज्योतिष एवं के तंत्र आचार्य डॉ. शैलेश मोदनवाल ने बताया कि 14 सितंबर यह तीज मनाई जाएगी। इस दिन उदया तिथि में तृतीया तिथि मिल रही है, जो सुबह 07:14 बजे तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी, जबकि चित्रा नक्षत्र के साथ ब्रह्म योग प्राप्त होगा जो बहुत ही फलदायी है। सर्वप्रथम इस व्रत को देवी पार्वती ने महादेव को पति के रूप में पाने के लिए किया था।
जिस दिन मां ने देवाधिदेव महादेव का पूजन किया था, उस दिन हस्त नक्षत्र व भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि थी। तभी से इस व्रत को मनाने की परंपरा का आरंभ हुआ।
भाद्रपद शुक्ल तीज को स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु के लिए तथा कुमारी कन्याएं अपने मनोवांछित वर की प्राप्ति के लिए हरितालिका तीज का व्रत करती है। व्रत विधान- इस व्रत के पूर्व स्त्रियां व कुंवारी कन्याएं अपने हाथों में मेहंदी रचाती हैं। व्रत के दिन तिल के पत्तों से अपने सिर को भिगोती हैं। पर्व के दिन नए वस्त्र को धारण करती हैं।
सुबह से ही पूजा की तैयारी करने में लग जाती हैं। सायंकाल के समय शिव मंदिर में जाकर विभिन्न वस्तुओं जैसे - हल्दी, रोली, अक्षत, भस्मी, भांग, धतूरा, मदार, बेलपत्र, दूर्वा, शमी पत्र, इत्र, धूप, दीप, नैवेद्य को अर्पण कर देवाधिदेव महादेव का पूजन करती हैं तथा सुहाग की वस्तुओं को चढ़ाकर देवी पार्वती की अर्चना करती हैं। संवाद