मोहनिया। राममंदिर भूमिपूजन के दौरान प्रसाद कैमूर जिले में पैदा होने वाले गोविंद भोग और कतरनी चावल से तैयार किया जाएगा। इसके लेकर लोगों में काफी खुशी है। किसानो के अनुसार अनुसार राममंदिर में इस चावल से प्रसाद बनने के बाद देश में इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है।
लोगों के अनुसार अयोध्या में जिस समय राम रसोई की शुरूआत हुई थी उस वक्त भी महावीर मंदिर पटना के प्रमुख आचार्य कुणाल किशोर ने लगभग 60 क्विंटल चावल कैमूर के मोकरी गांव से अयोध्या भेजा था। रामलला को लगने वाले भोग के लिए कैमूर के मोकरी गांव का कतरनी चावल भेजा जाएगा। इसको लेकर गांव स्थित राइस मिल मालिक नारद सिंह ने बताया कि यहां से ही अयोध्या चावल भेजा जाता रहा है। पिछले साल भी उनके राइस मिल से ही रामलला के लिए चावल भेजा गया था। उन्होंने बताया कि मोकरी गांव पहाड़ी से सटे कुछ क्षेत्र में सीधे पहाड़ी पानी गिरता है। जिससे गोविंद भोग नामक धान की खेती होती है। पहाड़ी से गिरने वाला औषधी युक्त रहता है इस वजह से यहां का उत्पादित चावल न केवल खुशबूदार होता है बल्कि खाने में भी काफी शुद्ध होता है। यहां के ग्रामीणों ने पांच अगस्त को भूमि पूजन के दिन दीपावली मनाने की तैयारी की है। गांव के सभी लोग अपने-अपने घरों में दिया जलाएंगे। बताया कि कैमूर कि पहाड़ पर माता मुंडेश्वरी का मंदिर है और मोकरी गांव माता के मन्दिर के तलहटी में है। हर साल बारिश का पानी पहाड़ी से मां मुंडेश्वरी के चरण और उनके स्थान को स्पर्श करते हुए मोकरी गांव के कुछ हिस्से के खेतों में गिरता है। इस इलाके का गोविंद भोग और कतरनी चावल अपने उच्चतम गुणों के कारण पूरे देश में प्रसिद्ध है।