मनुष्य अगर राम के स्वरूप को हृदय में उतार ले, तो उसे प्रभु की भक्ति सहज ही मिल जाती है। भगवान भक्त की रक्षा के लिये सदैव खड़े रहते हैं। सच्चे मन से निष्ठापूर्वक यदि भक्त उन्हें याद करते हैं, तो वह नंगे पैर ही दौड़े-दौड़े क्षण भर में उसके पास पहुंच जाते हैं। उक्त उद्गार खरौंझा स्थित राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय के प्रांगण में मानस प्रेम यज्ञ समिति के तत्वाधान मे चल रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पाचवीं निशा पर कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि हिरण्यकश्यपु ने अपने पुत्र भक्त प्रह्लाद से कहा कि क्या प्रभु इस खंभे को फाड़कर प्रकट हो सकते हैं? कहा कि प्रह्लाद की भक्ति भगवान में इस कदर थी कि उसने पत्थर में भगवान को प्रकट कर दिखाया। कहा कि इसी प्रकार जीवन में मनुष्य अगर संकल्प कर ले तो किसी कार्य की पूर्ति का विकल्प भगवान दे देते हैं। उन्होंनेे कहा कि भगवान राम संत थे और संत धर्म को बचाने के लिए कभी संहार नहीं करते। यदि मनुष्य में दुर्गण आ जाय तो सर्व प्रथम उसे दोष मुक्त करना भगवान का कर्तव्य हो जाता है। दुर्गुण से भरी ताड़का का वध भगवान राम ने किया, तो कृष्णावतार में भी सर्वप्रथम भगवान कृष्ण ने पूतना का वध कर नारी को दुर्गुण मुक्त कर दिया। कथा के दौरान परमानन्द पांडेय, लल्लन गिरि, उमा साव, जोगी साव, राधेश्याम द्विवेदी, विश्वनाथ दुबे, माधुरी शर्मा, राजेश आदि रहे।