दुलहीपुर। गंगा के तटवर्ती इलाकों में पानी घटने के साथ कटान का सिलसिला जारी है। तेजी से हो रहे कटान से तटवर्ती इलाकों के लोग परेशान हैं। कुंडा खुर्द के मल्लाह बस्ती में गंगातट पर स्थिति सौ वर्ष पुराना डीहबाबा मंदिर के गंगा में समाने के बाद अब हनुमान मंदिर के साथ ही पंप कैनाल पर भी खतरा मंडराने लगा है। कुंडा कला गांव में सिंचाई के लिए बने इस पंप कैनाल के आस पास की भूमि कट रही है।
नियामताबाद विकास खंड के बहादुरपुर, कुंडाखुर्द, कुंडा कला, मवई कला, सहजौर, कुरहना आदि गांवों में लगातार कटान हो रही है। सबसे खराब स्थिति कुंडा खुर्द और कुंडा कला गांव की है। कुंडा खुर्द के मल्लाह बस्ती में सौ वर्ष पुराना डीह बाबा मंदिर गंगा में नदी में समाने और कटान जारी होने के बाद रविवार की शाम डीएम नवनीत सिंह चहल और विधायक साधना सिंह ने गांव में पहुंच कर मौका मुुआयना किया। दूसरी तरफ अब कुंडा कला गांव में गंगा तट पर स्थापित पंप कैनाल कटान की जद में आ गया है।
10-10 क्यूसेक के दो पंप कैनालों से क्षेत्र के कुंडा कला, कुंडा खुर्द, मवई, भिसौड़ी, मलोखर आदि गांवों में खेतों की सिंचाई होती है। वर्ष 2015 में कटान तेज होने पर 1.45 करोड़ से पंप कैनाल का जीर्णोद्धार किया गया। पंप कैनाल के आस पास बोल्डर लगाए गये। इसके बाद फिर से कटान तेज हो गई और बोल्डर गंगा में समा रहे हैं। क्षेत्र के रमेश यादव, अनिल चौहान, भइया लाल, प्रकाश निषाद, अपुल, गुफरान सिद्दीकी, बबलू सिंह आदि ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही इसका जीर्णोद्धार नहीं रोका गया तो आंदोलन किया जाएगा।
दुलहीपुर। क्षेत्र के किसानों के सिंचाई के लिए कुंडा कला गांव के सामने पंप कैनाल लगाया है। इससे 10 से अधिक गांवों की सैंकड़ों एकड़ खेतों की सिंचाई होती है। इससे वहां के ग्रामीणों और किसानों में भय और नाराजगी है। किसानों का कहना है कि प्रशासनिक लापरवाही के चलते डीह बाबा का मंदिर डूब गया। हनुमानजी का मंदिर भी गिरने के कगार पर है। वहीं पंप कैनाल के सामने लगा बोल्डर भी गंगा में धंसने लगे हैं। इससे सिंचाई बाधित हुई तो किसानों को काफी परेशानी होगी