जमीन अधिग्रहण के मुद्दे पर धरना देते किसान।
फ्रेट कारीडोर योजना से प्रभावित किसानों का धरना 83 दिनों से मुख्यालय के करीब छीतो गांव में चल रहा है। किसानों का तर्क है कि उनकी जमीन का अधिग्रहण तो हो गया, पर उनकी उपेक्षा कर दी गई। प्रशासन पर आरोप लगाया कि उन्होंने जमीन अधिग्रहण के बदले प्रभावित किसान परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का वादा किया था। लेकिन यह वादा पूरा किए बगैर ही योजना का काम शुरू हो गया। नाराज किसान कभी नेताओं का तो कभी अधिकारियों का पुतला फूंक अपनी नाराजगी जता रहे हैं।
जिले में फ्रेट कारीडोर योजना के तहत पांच वर्ष पूर्व जीवनाथपुर से कर्मनाशा तक छोटे-बड़े लगभग 3600 किसानों की भूमि जिला प्रशासन के सहयोग से रेलवे ने ली थी। किसानों ने जब इसका विरोध किया तो एडीएम कोर्ट ने आदेश जारी किया कि जमीन के एवज में मुआवजे के अतिरिक्त प्रभावित परिवार के एक सदस्य को नौकरी और भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था भी होगी। लेकिन किसानों का आरोप है कि रेलवे और जिला प्रशासन के अपने वादों को पूरा नहीं किया। न तो बाजार रेट के तहत उनरो मुआवजा दिया गया, न ही पुनर्वास की व्यवस्था ही की गई। इसी के विरोध में लीलापुर, बिसौरी, छीतो, मचियां, सिरसी, हिनौती, जयरामपुुर, गंजख्वाजा सहित अन्य गांवों के प्रभावित किसान क्रमबद्ध रूप से धरना दे रहे हैं। साथ ही मांगें पूरी होने तक धरना जारी रखने को तैयार भी हैं।