स्थानीय रेलवे स्टेशन पर मंडल वाणिज्य विभाग के अधिकारियों ने खान पान स्टालों की जांच की। इस दौरान स्टाल संचालकों की ओर से खाने के सामान का बिल न देने पर नाराजगी जताई गई। नो बिल, फूड इज फ्री अभियान के तहत सीसीटीवी से जांच के आधार पर चार स्टालों से पांच यात्रियों का पैसा वापस दिलाया गया। इस तरह यात्रियों को मुफ्त भोजन मिला।
रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में खान पान सहित सभी स्टालों नो बिल नो पे योजना लागू है। इसके तहत सभी स्टाल संचालकों को किसी वस्तु की खरीदारी पर ग्राहक को बिल देना है। बिल न देने पर ग्राहक पैसे नहीं देंगे। सभी स्टालों पर नो बिल नो पे का स्टीकर चिपकाया गया है। बावजूद इसके स्टाल संचालक इस नियम का पालन नहीं करते हैं। खाना आदि लेने पर बिल नहीं देते हैं। और तो और ग्राहकों से अधिक पैसे भी वसूले जाते हैं। इन्हीं शिकायतों को देखते हुए वरीय मंडल वाणिज्य प्रबंधक रूपेश कुमार के नेतृत्व में शनिवार की देर रात नो बिल-फूड इज फ्री जागरूकता अभियान चलाया गया। सहायक वाणिज्य प्रबंधक आरएन त्रिवेदी सहित अन्य अधिकारियों ने स्टालों की जांच की। प्लेटफार्म संख्या दो पर आरपीएफ के सीसीटीवी निगरानी कक्ष में पहुंच कर विभिन्न प्लेटफार्म पर स्थित कैटरिंग स्टॉल की गतिविधियों का जायजा लिया। उन स्टालों को चिह्नित किया गया, जो बिल नहीं दे रहे थे। उसके बाद उन स्टाल पर जाकर मौके पर ही ग्राहकों को स्टॉल संचालक से पैसे वापस कराए गए। कुल चार स्टॉलों से पांच यात्रियों को पैसे वापस कराए गए और मुफ्त में खाने के सामान दिलवाए गए। इसके बाद सभी स्टॉल संचालकों को यात्रियों को बिल देने की हिदायत दी गयी। वहीं यात्रियों को भी खानपान स्टॉल से सामान खरीदने पर बिल अवश्य लेने के लिए जागरूक किया गया।