नौगढ़। छह करोड़ रुपये खर्च कर विकसित किए गए प्रमुख पर्यटन स्थलों की सुविधाएं दो साल में ही बदहाल हो गई हैं। लापरवाही और देखरेख के अभाव में 70 फीसदी सुविधाएं ध्वस्त हो गई हैं। राजदरी-देवदरी, छानपाथर और ओवरवाटांड़ जलप्रपात पर बैठने के लिए लगाए गए बेंच, बच्चों के झूले, आधुनिक गेम के उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई जगह बेंच और रेलिंग टूट गई हैं। वहीं, शौचालयों में गंदगी है और पेयजल संकट से भी लोगों को जूझना पड़ रहा है।
बरसात के मौसम में जिले के पर्यटन स्थलों पर सैलानियों की संख्या बढ़ जाती है। चारों स्थलों पर चंदौली के अलावा वाराणसी, मिर्जापुर, भदोही और बिहार से रोज 500 से ज्यादा पर्यटक हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर सुरक्षा के इंतजाम पर्याप्त नहीं हैं। पर्यटन स्थलों पर लगाई गई मशीनों और गेम के उपकरणों की नियमित देखरेख नहीं होने से उनकी हालत खराब हो गई है। बच्चों के लिए लगाए गए झूले क्षतिग्रस्त हो गए हैं। आंधी में प्रशासनिक और अन्य भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिनकी मरम्मत नहीं कराई गई। कहीं सड़क गड्ढों में तब्दील है तो कहीं क्षतिग्रस्त रेलिंग और जर्जर ढांचे पर्यटकों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। राजदरी स्थित शौचालयों में गंदगी है और पानी का संकट है। छानपाथर की सड़क खराब होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। ओवरवाटांड़ में शौचालय, पेयजल और बारिश से बचने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
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राजदरी और देवदरी में रेलिंग, कुर्सियां टूटीं
राजदरी और देवदरी जलप्रपात पर करीब दो करोड़ रुपये से विकास कार्य कराए गए थे। राजदरी में सैलानियों के बैठने के लिए लगाई गईं कुर्सियां और मेज टूट गई हैं। शौचालयों में पानी नहीं आने और गंदगी के कारण पर्यटकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों के झूले और गेम के उपकरण क्षतिग्रस्त हो गए हैं। कई जगह रेलिंग टूट चुकी है तो राजदरी तक जाने वाली सड़क भी खराब है।
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छानपाथर में सड़क से लेकर भवन तक बदहाल
छानपाथर जलप्रपात पर करीब चार वर्ष पहले दो करोड़ रुपये से विकास कार्य कराया गया था। जलप्रपात तक जाने वाली सड़क गड्ढों में तब्दील है, बरसात में वाहन फिसलने का खतरा रहता है। 13 मई को आए तूफान में गौलाहट क्षेत्र के सुवेनियर, सांप और एडमिन ब्लॉक क्षतिग्रस्त हुए थे। पर्यटकों के बैठने और अन्य सुविधाओं के कई ढांचे बंद पड़े हैं। जीप क्लेमिंग सहित अन्य सुविधाएं भी लंबे समय से ठप है।
ओवरवाटांड़ में शौचालय और पेयजल की व्यवस्था नहीं
ओवरवाटांड़ जलप्रपात पर करीब दो करोड़ रुपये से विकास कार्य कराया गया था लेकिन महिलाओं के लिए शौचालय और पेयजल की व्यवस्था नहीं है। जलप्रपात की ओर रेलिंग और पर्याप्त शेड की व्यवस्था नहीं होने से सैलानियों के लिए खतरा बना रहता है। फोटो और सेल्फी के लिए लोग झरने के किनारे तक पहुंच जाते हैं, जिससे कभी हादसा भी हो सकता है। 13 मई को आए तूफान में प्रशासनिक भवन, एडमिन ब्लॉक, बिजली की वायरिंग और शौचालय की छत क्षतिग्रस्त हुई थी।
कोट-
पर्यटकों की सुरक्षा के लिए वन विभाग की ओर से लगातार व्यवस्था कराई जा रही है। रेलिंग, झूले और सड़क क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें मिली हैं। इनकी रिपोर्ट बनाकर भेजी गई है। जल्द ही पर्यटकों के लिए सुविधाएं दुरुस्त कराई जाएंगी। - बी. शिवशंकर, डीएफओ।
राजदरी जलप्रपात पर लगाई गई लोहे की रेलिंग टूटकर गिरी। संवाद
राजदरी जलप्रपात पर लगाई गई लोहे की रेलिंग टूटकर गिरी। संवाद