बुधवार को फिर हुई बरसात ने किसानों के दर्द को और बढ़ा दिया। बुधवार को
पुन: करीब डेढ़ घंटे झमाझम बारिश हुई। खेत हो या खलिहान, तैयार फसल भीग रही
है। उसके दाने खराब हो रहे हैं। पिछले तीन दिनों से हो रही बारिश से किसान
बेबस और लाचार हैं।
एक सप्ताह पूर्व मौसम के बदलाव से किसान
अभी उभर ही नहीं पाए थे कि इस बीच मौसम ने फिर यू टर्न लिया। किसानों की
मानें तो लगभग 50 प्रतिशत से अधिक का नुकसान हुआ।
वहीं सरकारी आंकडे़ अब तक
लगभग 20 प्रतिशत पर ही टिके हैं। बुधवार को जिलाधिकारी एनके सिंह ने
किसानों की फसलों के आंकलन के लिए टीम गठित कर के गुरुवार की सायंकाल तक
रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
गौरतलब है कि पिछले तीन
दिनों से रुक रुक कर बारिश हो रही है। ओलावृष्टि और तेज हवा तैयार फसल को
बर्बाद कर चुकी हैं। आलम यह है कि अधिकांश किसान कटाई व मड़ाई के लिए मौसम
के खुलने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन मौका नहीं मिल रहा है।
बीते मंगलवार
को शाम झमाझम बारिश के साथ ही ओले पड़े। डेढ़ घंटे तक हुई बारिश से खेतों
में पानी जमा हो गया, जिससे गेहूं के बोझ खराब शुरू हो गए हैं। वहीं गेहूं
की खड़ी फसल तेज हवा के झोकों और ओलों की मार से जमीन पर लेट गई है, जो
पानी के संपर्क में आकर काली होने लगी है।
बरहनी विकासखंड के कम्हरियां
गांव के किसान अनिल कुमार सिंह, धानापुर विकासखंड के बहेरी गांव के किसान
राकेश सिंह, जनौली गांव के किसान लवकुश चौबे, सकलडीहा विकासखंड के कटसिल
गांव के किसान दयाशंकर पाठक, नियामताबाद विकासखंड के नियामताबाद गांव
निवासी रजनीश सिंह आदि किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल पूरी तरह से तबाह
होने की कगार पर पहुंच गई है और हम लोग गाढ़ी कमाई होती देख खून के आंसू
बहा रहे हैं। समझ में नहीं आ रहा है कि वह गुहार लगाए भी तो किससे।
ऐसे में
किसान बस यह दुआ कर रहे हैं कि जल्द मौसम ठीक हो जाए।