किया/ शिकारगंज । बाजार में गेहूं की बिक्री मूल्य अच्छा होने के चलते किसान क्रय केंद्र पर गेहूं बेचने के लिए नहीं आ रहे हैं। जिससे क्रय केंद्र प्रभारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं। वहीं बाजार भाव टाइट होने के बावजूद किसान संगठन क्रय केंद्रों पर खरीद कराने के लिए पूरा दबाव बनाए हुए हैं। सरकार ने इस वर्ष के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2015 रुपये प्रति कुंतल तय किया है। इस समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए किसानों के सामने कई परेशानियां आती हैं। गेहूं को अपने खलियान से उठाकर क्रय केंद्र पर ले जाना वहां गेहूं की तौलाई के लिए प्रति कुंटल 25 से 30 रुपये तक पल्लेदारी देने वहीं बोरे का वजन तथा गेहूं में मौजूद गर्द के नाम पर एक किलोग्राम गेहूं की कटौती करने तथा गेहूं बेचने के लिए अंगूठा लगाने के लिए क्रय केंद्रों पर चक्कर लगाने तथा भुगतान के लिए बार-बार सिफारिश करनी जैसी समस्याओं से जूझना पड़ता है। जबकि बाजार के निजी खरीदार किसान के खलिहान से सीधे गेहूं तौलकर उठा रहे हैं तथा 1900 प्रति कुंतल की दर से भुगतान भी जल्दी कर रहे हैं । जिससे किसानों को सहूलियत हो रही है।क्षेत्रीय किसान अजय मौर्य, मंगला राय, दीपू पटेल, वीरेंद्र सिंह कहते हैं कि गेहूं को क्रय केंद्र पर बेचने के लिए तमाम परेशानियों के साथ कम से कम 80 से 100 रुपये प्रति कुंतल खर्च हो जाते हैं। जबकि निजी खरीदार को गेहूं बेचने के लिए आसानी हो रही है। जिला विपणन अधिकारी अनूप कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि जिले में सभी क्रय केंद्रों को सक्रिय कर दिया गया है तथा किसानों का गेहूं हर हाल में खरीदा जाएगा।