पिछले दो वर्षों से सूखे की मार झेल रहे किसान अप्रैल माह में ही पड़ रही भीषण गर्मी को देख इसे अच्छे मानसून का आगाज मान रहे हैं। कृषि वैज्ञानिकों और किसानों का कहना है कि जब-जब भीषण गर्मी पड़ी है तब तब मानसून अच्छा रहा है और बारिश भी अच्छी हुई है। कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को अति आत्मविश्वास से बचते हुए कम पानी वाली धान की प्रजातियों की खेती करने की सलाह दी है।
पिछले खरीफ सत्र के दौरान जिले में एक लाख 11 हजार हेक्टेयर भूमि में धान की खेती का लक्ष्य सरकार द्वारा निर्धारित किया गया था। लेकिन कम बारिश और सूखे के चलते किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। लेकिन इस बार अप्रैल माह में पड़ रही भीषण गर्मी से किसानों में अच्छी बारिश के आसार जग गए हैं और किसान अभी से खेती-बारी के संसाधनों को दुरुस्त करने में जुट गए हैं। इमिलिया गांव के किसान हरीश सिंह का कहना है कि मानसून के विफलता का क्रम पिछले कई वर्षों से जारी है। इसके चलते किसानों को खेती में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। इस बार अच्छे बारिश की संभावना को देखते हुए फिर से पुराने दिन लौटने के आसार प्रबल हो गए हैं। किसान चंद्रदेव शर्मा का कहना है कि अच्छे मानसून के आसार ने किसानों में संजीवनी का कार्य किया है। कम्हरियां गांव निवासी किसान अनिल सिंह का कहना है कि अच्छे मानसून की संभावना को देखते हुए किसान काफी खुश हैं और अपनी तैयारियों में लगे हुए हैं। पई गांव के किसान देवेंद्र राय का कहना है कि अच्छे मानसून की संभावना से किसानों की उम्मीदें बंध गई हैं।
इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी कमलजीत सिंह का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से किसानों पर कम बारिश व मौसम की भारी मार पड़ी है। किसान खेती में घाटा सहने को विवश हैं। ऐसे में किसान मूंग और बहु फसलीय फसलों की खेती कर सकते हैं।