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किसान कर रहे हैं स्ट्रॉबेरी की खेती

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चंदौली। धान के कटोरे के रूप में विख्यात चंदौली जिले में अब किसान परंपरागत खेती की लीक से हटकर ज्यादा मुनाफा वाले खेती पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। रबी, खरीफ व जायद की फ़सलों के इतर उन फसल की ओर रुख केंद्रित कर रहे हैं। जो अभी तक जनपद में कोई किसान नहीं कर पा रहा है। दूसरे प्रदेशों से उन फसलों के गुण सीख कर जनपद में उसका अभिनव प्रयोग कर रहे हैं। चकिया के फिरोजपुर गांव निवासी अनिल मौर्य सैयदराजा के मानिकपुर में पांच बीघे जमीन पेशगी पर लेकर स्ट्राबेरी फसल की शुरुआत की है। दावा किया कि वह पूर्वांचल में पहले किसान है जो स्ट्राबेरी की खेती करने की शुरुआत की है।
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सैयदराजा थाना क्षेत्र के मानिकपुर में आस्ट्रेलियन फल स्ट्राबेरी की खेती शुरु हो गई है। अनिल मौर्य फल को वाराणसी के पहड़िया मंडी में बेचते है। उनका दावा है कि परांपरिक खेती से चार गुना अधिक फायदा स्ट्रॉबेरी की खेती में है। लागत भी बहुत ज्यादा नहीं है। बताया कि स्ट्रॉबेरी की खेती के बारे में उन्होंने महाराष्ट्र के महबलेश्वरम में किसानों से जानकारी ली। जहां बड़े पैमाने पर किसान स्ट्राबेरी की खेती करते है। शुरुआत दौर में पांच विस्वा में स्ट्राबेरी तथा शेष खेत में मिर्च और टमाटर की खेती किया है। अनिल ने बताया कि पोस्ट ग्रेजुएट करने के बाद उनका विचार स्टॉबेरी की खेती के तरफ हुआ। इसके बाद वह इसमें जुट गए।
चंदौली। धान के कटोरे में पारंपरिक खेती से ऊपर उठकर स्ट्रॉबेरी की खेती कृषि क्षेत्र के लिए नई क्रांति हो सकती है। कल तक अन्य प्रांतों में उपजे स्ट्रॉबेरी का स्वाद चखने वाले लोग अब जिले में उत्पादित स्ट्रॉबेरी का स्वाद लेंगे। हालांकि स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत मानिपुर में अनिल मौर्य ने की है। परंतु मांग और बाजार को देख अन्य किसान भी इस ओर मुड़ने लगे हैं। इस खेती से जुड़े किसान अनिल मौर्य की माने तो स्ट्रॉबेरी की खेती यहां के जलवायु के अनुकूल है। कम पूंजी व छोटी जमीन से किसान अधिक आय प्राप्त कर सकते हैं। सबसे खास है कि व्यापक बाजार के साथ-साथ कीमत भी अच्छी मिल रही है।
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चंदौली। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. समीर पांडेय ने बताया कि महाराष्ट्र के पुणे में किसान स्ट्रॉबेरी की खेती करते है। बलुई दोमट मिट्टी स्ट्रॉबेरी खेती के लिए उपयुक्त है। कम लागत व कम क्षेत्र में भी इसे लगाकर किसान अपनी आमदनी को बढ़ा सकते हैं। बताया कि स्ट्रॉबेरी औषधीय पौधा के साथ-साथ सब्जी, आचार कई कामों में इसका उपयोग किया जाता है। जिसके कारण इसे बाजार भी आसानी से उपलब्ध हो जाता है। स्ट्रॉबेरी की पत्ती आयरन युक्त रहने के कारण यह औषधि के रूप में भी प्रयोग किया जाता है। निश्चित ही आने वाले दिनों में अधिक रकबे में स्ट्रॉबेरी की खेती होने की संभावना बनी है।
किसान अनि मौर्य द्वारा स्टॉबेरी की खेती करना सराहनीय कदम है। इससे किसान की आय में बढ़ोत्तरी होगी। जल्द ही अधिकारियों की टीम किसान के फसल का निरीक्षण करेंगी तथा उद्यान विभाग से संचालित योजनाओं का लाभ देने के लिए जिला प्रशासन से मंजूरी दिलाई जाएगी। नन्हेलाल वर्मा, जिला उद्यान अधिकारी।
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