शिकारगंज । महंगाई के दौर में जहां एक तरफ खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों को लेकर महिलाएं परेशान है तो वहीं दूसरी तरफ सब्जियों की बढ़ती कीमतें उनकी मुश्किलें बढ़ा रही है। गरीबों की थाली में हरी सब्जियां गायब होती जा रही है। कुछ दिन पहले जहां हरी सब्जियों के कुछ रेट रहे वहीं अब इनके दामों में निरंतर आ रहे उछाल से विशेषकर गरीब परिवार प्रभावित है।
आलू प्याज और टमाटर को छोड़कर अन्य सब्जियों के दाम बढ़ गए हैं जिस घर में संयुक्त परिवार है वहां दो वक्त खाने में सब्जी परोसने के चक्कर में सौ के नोट कम पड़ जा रहे हैं। ऊपर से ईंधन, तेल मसाले का खर्च अलग से। कुछ दिन पहले 80 रुपये प्रति किलोग्राम बिकने वाला परवल इन दिनों 100 रुपये पहुंच गया है। इसी तरह से भिंडी 30 रुपये प्रतिकिलो, करैला 40 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है तथा बोड़ा 80 रुपये प्रति किलो, कटहल 40 रुपया प्रति किलो व इसी तरह लौकी 25 से 30, खीरा 25 रुपये किलो पहुंच गया है। गृहणी कंचन देवी ने कहा कि पहले खाद्य तेल और गैस ने रसोई का बजट बिगाड़ा था। अब सब्जियों की बढ़ी कीमतों से घर और परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है । कई सब्जियां तो गरीबों की पहुंच से दूर हो गई है। ऐसे में समझ में नहीं आ रहा है कि घर का खर्च कैसे चलाया जाए। राधिका देवी ने कहा कि सब्जियों पर छाई महंगाई से गरीबों की थाली में हरी सब्जियां गायब होती जा रही है। अब तो सब्जियां खरीदने में 100 रुपये का नोट भी कम पड़ जा रहा हैं । तेल और मसाले का खर्च ऊपर से पढ़ रहा है। सरकार को महंगाई पर नियंत्रण लगाना चाहिए। सब्जी विक्रेता नारायण सोनकर, राजनाथ सोनकर, अशोक सोनकर, मुन्ना सोनकर ने बताया कि सब्जी के किसानों द्वारा मिलने वाली सब्जी पर कम मार्जिन रखकर बिक्री किया जा रहा है।