नियामताबाद। उद्योग लगाने या फिर उद्योगों के विस्तार के लिए उद्यमियों को बैंकों से ऋण लेने में काफी चक्कर लगाने पड़ते थे मगर लॉकडाउन के दौरान छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग एमएसएमई (एमएसएमई) के तहत जो राहत पैकेज दिया है इससे उद्यमियों को ऋण लेने में आसानी हुई है। साथ ही ब्याज दर भी कम की गई है।
उद्यमियों का कहना है कि इसबार बैंकों से ऋण लेने में काफी सहूलियत हुई है। बैँकों का अधिक चक्कर नहीं लगाना पड़ रहा है। बैंक भी ऋण देने में रुचि ले रहे हैँ और उद्यमी अपनी जरूरत के अनुसार ऋण ले रहे हैं।
रामनगर औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी सुनील अग्रवाल का कहना है कि पहले बैंकों से ऋण लेने में बहुत दिक्कत होती थी। लेकिन इस बार एमएसएमई के तहत सरकार ने जो राहत दी है और बैंकों को भी निर्देश दिए गए हैं कि ऋण देने में परेशान न किया जाए, इससे काफी राहत मिली है। ऋण जरूरत के अनुसार आसानी से मिल जा रहा है। उद्यमी सुरेंद्र सोनी का कहना है कि इस बार ऋण आसानी से मिलने के साथ ही कम ब्याज पर मिल रहा है। पहले एमएसएमई के तहत मिलने वाले ऋण पर 10 फीसदी ब्याज लगता था अब साढ़े सात फीसदी ब्याज पर ऋण मिल रहा है। राहत की बात यह है कि बैंक पेपर की खानापूति के मामले में परेेेशान नहीं कर रहे हैं। वहीं औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी अमित तुलस्यान का कहना है कि लाकडाउन में छोटे उद्योग बंद होने के कगार पर पहुंच चुके थे। सरकार ने राहत की घोषणा तो उम्मीद जगी। लेकिन यह भी डर सता रहा था कि बैँक ऋण देने में परेशान करेंगे मगर इस बार बैँकों से आसानी से ऋण मिल जा रहा है। यहीं के उद्यमी अंजनी अग्रवाल कहते है कि लॉकडाउन में कारोबार ठप हो चुका था। मगर अनलाक होने और राहत पैकेज की घोषणा के बाद बैँकों से ऋण मिल रहा है। पहले बैंकों से ऋण लेना आसान नहीं था। कागज पूरा करने के नाम पर काफी चक्कर लगाना पड़ता था लेकिन इस बार बैंक भी सहयोग कर रहे हैं और ऋण आसानी से मिल जा रहा है।