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बढ़ते तापमान का स्कूली बच्चों पर पड़ रहा असर, हो रहे बीमार

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पीडीडीयू नगर। गर्मी छात्र-छात्राओं पर भारी पड़ रही है। गर्मी से बच्चों में पानी की कमी से तबीयत खराब होने लगी है। अप्रैल में ही मई, जून जैसे गर्मी पड़ रही है। जिले का तापमान 42 डिग्री को पार कर गया है। बढ़ती गर्मी के असर से बच्चों में तेज बुखार, डिहाइड्रेशन उल्टी और दस्त जैसी समस्या आ रही है। हालांकि गर्मी का प्रकोप देखते हुए जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों के समय में बदलाव कर दिया है। डीएम ने एक से आठ तक की कक्षाओं को सुबह साढ़े सात से 12 बजे तक संचालित करने का निर्देश दिया है।
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गर्मी का जितना असर बड़ों पर होता है उससे कही ज्यादा बच्चों पर गर्मी कहर ढाती है। सुबह स्कूल जाते समय, स्कूल में प्रार्थना करते हुए, ग्राउंड में खेलते हुए और फिर घर आते हुए कड़ी धूप बच्चों को अपनी चपेट में ले लेती है। इसके चलते बच्चों को लू लगने की संभावना बढ़ जाती है। इससे बचने के लिए उन्हें गर्मियों में स्कूल भेजते समय ऐसे फूड देने चाहिए जो उनकी फुर्ती बनाए रखे, उन्हें पोषण दे और शरीर में पानी की कमी न होने दे। इससे लू लगने की संभावना क्षीण हो जाती है।
कोरोना की वजह से काफी समय से बच्चों की स्कूल जाने की आदत छूट गयी थी लेकिन अब एक बार फिर से बच्चे स्कूल जाने लगे हैं। ऐसे में बच्चों की देखभाल आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा जरूरी हो गई है।
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बच्चों की डाइट में ऐसी चीजों को शामिल किया जा सकता है जो गर्मी और धूप से बचाने में उनकी मदद कर सके। सत्तू खाने या पीने से बच्चों को लू लगने की संभावना काफी कम हो जाती है । जौ या चने से बना सत्तू शरीर को ठंडा रखने में भी मदद करता है। बच्चों के डाइट में तरबूज को भी शामिल कर सकते हैं। तरबूज में 92 प्रतिशत तक पानी होता है। यह शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। बच्चों की डाइट में दही को भी शामिल किया जा सकता है। पुदीने का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। बच्चों को नींबू पानी भी पिलाना फायदेमंद होता है।
डा. सीएस झा, बाल रोग विशेषज्ञ, मंडलीय अस्पताल, लोको, पीडीडीयू नगर।
छोटे बच्चों की सुबह सात से 10 बजे तक व बड़े बच्चों की 10 बजे से दोपहर एक बजे कक्षाएं लगनी चाहिए। बढ़ती गर्मी से राहत देने के लिए स्कूल की टाइमिंग में बदलाव की जरूरत है। सुनीता प्रजापति। व्यवस्था सही ढंग से नहीं होने के कारण छोटे बच्चों को स्कूल जाने आने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। छोटे व बड़े बच्चों की कक्षाओं के समय में बदलाव होना चाहिए। आरती यादव। इस समय पड़ रही गर्मी को देखते हुए स्कूलों में बच्चों द्वारा की जाने वाली प्रार्थना में सावधानी बरतने की जरूरत है। खुले आसमान की बजाए किसी छत वाली जगह पर प्रार्थना करानी चाहिए। अमित केशरी। बच्चों की कक्षाएं हवादार होनी चाहिए। साथ ही सभी कक्ष में बच्चों की संख्या के अनुसार पंखे की व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे वे गर्मी व लू लगने से बचे रह सकते हैं। मनीष गुप्ता।
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