बाजार में सब्जी की लगी दूकान।
भले ही महंगाई पर केंद्र सरकार गंभीर हो लेकिन पिछले एक माह में महंगाई तेजी से बढ़ गई है। अनाज ही नहीं फल एवं सब्जी की कीमतों में भी इजाफा हुआ है। पेट्रोलियम की कीमतों में बढ़ोत्तरी से भी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं। इससे लोगों की जेब हल्की हो रही है। चाहे व्यवसायी वर्ग हो अथवा नौकरी पेशा या गृहिणी, सभी बढ़ती महंगाई से पस्त हैं और सरकार को कोसते दिखते हैं।
कैलाशपुरी निवासी गृहिणी रेनु तिवारी कहती हैं कि महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही है। सरकार का इस पर नियंत्रण ही नहीं है। इसका नतीजा यह हुआ है कि घर का किचन संभालना मुश्किल होता जा रहा है। सर्वाधिक दालों और सब्जियों की कीमत को बढ़ने की वजह से होती है। व्यवसायी की पत्नी कैलाशपुरी निवासी अर्चना उपाध्याय कहती हैं कि महंगाई को लेकर सभी राजनीतिक दल भी चुप हैं, जबकि लोग सबसे अधिक परेशान हैं। एक माह के भीतर दाल की कीमत दस से तीस रुपये तक बढ़ी है। वहीं सब्जियों की कीमत में काफी इजाफा हुआ है। इससे रसोई संभालना मुश्किल हो रहा है। घर का बजट भी गड़बड़ाने लगा है। फल व्यवसायी अशोक सोनकर कहते हैं कि महंगाई का सर्वाधिक असर सभी वर्ग पर पड़ता है। महंगाई की वजह से व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा है। पेट्रोलियम की कीमत बढ़ने से भी महंगाई बढ़ रही है। यही नहीं मौसम का भी प्रतिकूल असर फल एवं सब्जियों पर ही पड़ रहा है। शिक्षक सुरेश जायसवाल कहते हैं कि नौकरी पेशा वर्ग पर महंगाई का अधिक असर दिख रह है। तनख्वाह तो निश्चित ही मिल रही है लेकिन जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है उससे बचत कम हो रही है और बजट गड़बड़ा रहा है।