पीडीडीयू नगर। कुछ दिनों तक ठीक रहने के बाद बिजली व्यवस्था एक बार फिर बेपटरी हो गई है। पिछले तीन दिनों से बार-बार बिजली कटौती के कारण जनजीवन बेहाल हो गया है। चंदासी विद्युत उपकेंद्र से जुड़े सभी छह फीडरों का यही हाल है। सबसे ज्यादा परेशानी फीडर संख्या दो, चार व पांच से जुड़े उपभोक्ताओं को उठानी पड़ रही है। नगर के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली ना मिलने से लोगों को पानी के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। परेशान होकर लोग प्रदेश के उर्जा मंत्री तक के पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही है।
नगर की बिजली आपूर्ति इन दिनों बिल्कुल चरमरा गई है। जरा सी बारिश होते या हवा के चलते ही आपूर्ति ठप हो जा रही है। इसके बाद लोगों को घंटों बिजली के आने का इंतजार करना पड़ रहा है। सुबह से आरंभ होने वाली कटौती देर शाम व रात तक हो रही है। बृहस्पतिवार, शुक्रवार व शनिवार को तो बिजली हर आधे घंटे पर जाती रही। कटने के बाद बिजली का लोगों को घंटो इंतजार करना पड़ रहा था। संबसे ज्यादा कटौती फीडर संख्या दो के उपभोक्ताओं को उठानी पड़ी। शुक्रवार व शनिवार की सुबह कई बार बिजली के आने-जाने के कारण लोगों को पानी के लिए भी परेशानी उठानी पड़ी।
बात करने पर अधीशासी अभियंता विद्युत वितरण खंड द्वितीय प्रवीन कुमार सिंह ने बताया कि गर्मी और उमस से लोड बढ़ जाने के कारण समस्या उत्पन्न हो रही है। इसके अलावा हीटिंग बढ़ने से तार टूट रहे हैं। गड़बड़ियों को दुरुस्त करा दिया जा रहा है।
दूसरी तरफ बिजली कटौती से परेशान उपभोक्ताओं ने उर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा के पोर्टल पर शिकायत किया, इसके अलावा चहनिया क्षेत्र के सत्यप्रकाश ने शनिवार को पोर्टल पर उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में कई माह से बिजली आपूर्ति में आ रहे व्यवधान से मंत्री को अवगत कराया। साथ ही जेई की भी शिकायत नहीं सुनने के बारे में लिखा। कहा कि इन दिनों क्षेत्र को मात्र चार से पांच घंटे ही बिजली मिल रही है। वहीं क्षेत्र के बीके सिंह व धानापुर क्षेत्र के मुकेश वत्स ने भी बिजली न मिलने की समस्या पोर्टल पर लिखी। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की गई।
बिजली न रहने से धान की खेती भी प्रभावित हो रही है। इस समय धान की खेती के लिए पानी की अत्यंत जरूरत है। जिन इलाकों में नहर की सुविधा नही है उन इलाकों में सिंचाई के लिए सरकारी व निजी नलकूप लगे हैं। बिजली न रहने से नलकूप शोपीस बनकर रह गए हैं। इससे किसानों की खेती पूरी तरह बरसात पर निर्भर हो गई है।