नगर निकायों के पास कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी का कोई इंतजाम नहीं होने पर नगर के सुभाष नगर निवासी नरेंद्र अरोड़ अपने एनजीओ के माध्यम से आवारा कुतों की नसबंदी और एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाते है। नरेंद्र अरोड़ा ने बताया कि उनकी संस्था वाराणसी फॉर एनिमल्स के जरिये एक साल में 150 से 200 कुत्तों की नसबंदी करवाने के साथ उन्हें एंटी रैबीज के इंजेक्शन लगवाते है। बताया कि प्रत्येक कुत्ते पर एक से डेढ़ हजार रुपये तक का खर्च आता है।
क्या कहते हैं लोग
- नगर में कुत्तों की संख्या काफी बढ़ गई है। कई बार कुत्ते आक्रामक हो जाते है। नगर पालिका प्रशासन को इस पर ध्यान देना चाहिए। -अभय, सिद्धार्थपुरम कालोनी, पीडीडीयू नगर
- आवारा कुत्तों अक्सर बाइक से आने वालों को दौड़ लेते है। कई बार इनसे बचने के चक्कर में बाइक सवार गिरकर चोटिल भी हो जाते है। -प्रशांत, सुभाषनगर, पीडीडीयू नगर
- आवारा कुत्ते दिन में कई बार छोटे बच्चों पर भी हमला कर देते है। इनकी रोकथाम के लिए प्रयास होना चाहिए। -मोहित यादव, कुढ़े खुर्द पीडीडीयू नगर
क्या कहते हैं अधिकारी
- नगर पालिका के पास आवारा कुत्तों को पकड़ने की कोई व्यवस्था नहीं है। लेकिन जनसमस्या को ध्यान में रखते आवारा कुत्तों को पकड़ने के शीघ्र ही उपाय किए जाएंगे। - विकासधर दूबे, प्रभारी ईओ, पीडीडीयू नगर
- आवारा कुत्तों को पकड़ने और नसबंदी के लिए विभाग के पास कोई व्यवस्था नहीं है। यह नगर पंचायत और नगर पालिका की जिम्मेदारी है वह इसकी रोकथाम के लिए उपाय करें। -आरके सिंह, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी