चकिया। स्थानीय जिला संयुक्त चिकित्सालय में टेक्निशियन के अभाव में 40 लाख की डिजिटल एक्सरे मशीन एक वर्ष से धूल फांक रही है। यहां चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी से लोगों को इलाज कराने में परेशानी हो रही है। यह जिले का दूसरा सबसे बड़ा अस्पताल है। 100 बेड के इस अस्पताल का 60 बेड कोरोना वार्ड के लिए आरक्षित किए जा चुके हैं। अस्पताल की ओपीडी में चकिया क्षेत्र के साथ ही बिहार और मिर्जापुर जिले के सीमावर्ती क्षेत्र के रोगी आते हैं लेकिन यहां तकनीकी विशेषज्ञ तथा स्टाफ नर्स की कमी से अस्पताल जूझने को विवश हैं।
वर्ष 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने चकिया क्षेत्र को इस अस्पताल की सौगात दी थी। शिलान्यास के दौरान उन्होंने अस्पताल को ग्रामीण चिकित्सा के क्षेत्र में मील का पत्थर करार दिया था। अस्पताल में इस समय सभी रोगों के विशेषज्ञ 19 चिकित्सक नियुक्त हैं। लेकिन महिला चिकित्सक के दो पदों में से सिर्फ एक ही महिला चिकित्सक है। इससे महिला रोगियों को दिक्कत हो रही है। अस्पताल के स्टाफ नर्स के 21 पद हैं जिसमें से 11 की ही तैनाती है। बड़ा अस्पताल होने के बावजूद एमआरआई मशीन व सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है तथा इकोकार्डियोलॉजी लैब भी नहीं है। अस्पताल में टेक्निशियन उपलब्ध न होने के कारण डिजिटल एक्सरे सेवा एक वर्ष से बाधित है। 40 लाख की लागत से आई डिजिटल एक्सरे मशीन सफेद हाथी बनी हुई है। अस्पताल में एनीस्थीसिया के तीन डॉक्टरों में सिर्फ एक डॉक्टर ही उपलब्ध हैं। अस्पताल में लैब अटेंडेंट नहीं है। जांच घर में डेंगू की किट उपलब्ध होने के बावजूद टेक्नीशियन न होने से जांच नहीं हो पा रही है। इससे मरीजों की संख्या बढ़ने से दिक्कत होती है। मरीजों की शिकायत है कि अस्पताल में दवाई होने के बावजूद चिकित्सक बाहर की दवाएं लिखते हैं तथा अस्पताल में दलालों की सक्रियता से मरीजों का शोषण होता है।
जिला संयुक्त चिकित्सालय मे चिकित्सा कर्मियों की कमी को पूरा करने के लिए जिले से मांग की गई है। ताकि डिजिटल मशीन को शुरू किया जा सके। चिकित्सालय में आने वाले मरीजों को उपलब्ध संसाधनों से चिकित्सालय की सुविधाएं दी जा रही है।
डॉ. उषा यादव, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला संयुक्त चिकित्सालय, चकिया
अस्पताल में एक्सरे न होने से होती है दिक्कत
चकिया। जिला संयुक्त चिकित्सालय में टक्निशियनों की कमी का खामियाजा आम मरीजों को उठाना पड़ रहा है। एक्सरे न होने से मरीजों को बाहर पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
नगर के वार्ड नंबर 6 निवासी केवली देवी का कहना है कि अस्पताल में सुविधा होने के बावजूद गरीबों तक लाभ नहीं पहुंच पाता जिसके लिए चिकित्सालय प्रशासन जिम्मेदार है। शिकारगंज क्षेत्र के बोदलपुर गांव निवासी उदयनाथ यादव कहते हैं कि जिले का बड़ा अस्पताल होने के बावजूद अस्पताल की पहुंच ग्रामीण क्षेत्रों तक नहीं हो पाई है। नगर के सहदुल्लापुर निवासी धर्मेंद्र कुमार कहते हैं कि प्रभावशाली लोगों का दबाव अस्पताल पर बना रहता है जिससे आम मरीजों को परेशानी होती है। विकास खंड के अमरावती गांव निवासी फूलचंद पाल कहते हैं कि अस्पताल में जांच की तमाम सुविधाएं होने पर भी आम मरीज को इंतजार करना पड़ता है तथा जांच में देरी के कारण दोबारा अस्पताल आना पड़ता है।