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मिलने लगे डेंगू के मरीज, कागज पर बनाया वार्ड

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चंदौली। बारिश के बाद अब कोरोना काल में डेेंगू मरीजों की भी दस्तक होने लगी है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि डेंगू से निबटने के लिए इसकी पूरी तैयारी कर ली गई है। लेकिन हकीकत इससे दूर है। विभाग की तैयारी कागजों तक ही सिमटी है। कोरोना वायरस वार्ड को ही डेेंगू वार्ड बनाया गया है मगर वार्ड के दरवाजे पर अभी कोरोना वायरस वार्ड ही लिखा है। गनीमत है कि अभी तक जिले में डेंगू के सिर्फ एक संदिग्ध मरीज मिलने की पुष्टि हुई है।
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डेंगू की बीमारी से निबटने के लिए जिले में तैयारी मुकम्मल नहीं है लेकिन विभाग पूरी तरह से तैयार होने का दावा कर रहा है। विभाग के लिए राहत की बात यह है कि जनपद में डेंगू का प्रकोप पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है। पिछले वर्ष 146 संदिग्ध मरीजों में 25 डेंगू मरीजों की पुष्टि हुई थी। लेकिन इस वर्ष अभी तक डेंगू का एक संदिग्ध मरीज मिला है। डेंगू से निपटने के लिए स्वास्थ्य महकमा की ओर से मुख्यालय स्थित पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय व चकिया जिला चिकित्सालय में 10-10 बेड के अलावा धानापुर, भोगवारे, नौगढ़ व सकलडीहा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर पांच-पांच बेड की व्यवस्था का दावा किया जा रहा है।
डेंगू के मच्छर की पहचान, रखें सावधानी
डेंगू के मच्छर को इसके शरीर एवं पैरों पर विशेष सफेद छोटे-छोटे धब्बों के द्वारा पहचाना जा सकता है। यह एक घरेलू प्रकार का मच्छर है जो रुके हुए पानी में प्रजनन करता है तथा 100-200 मीटर तक की पहुंच तक उड़ सकता है। यह ज्यादातर ठंडे छायादार जगहों पर घर के भीतर व बाहर पनपता है। मादा मच्छर ज्यादातर अपने अंडे घर के आस-पास रखे कनस्तरों, डिब्बों आदि में पैदा करती है जो दस दिन में ही वयस्क मच्छर में बदल जाते हैं। घरों में कूलर वह अन्य स्थानों पर लगने वाले पानी को नष्ट कर देना चाहिए, ताकि डेंगू के मच्छर होने ना पाए।
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डेंगू के ये हैं लक्षण
डेंगू बुखार में ठंड लगती है और शरीर का ताप बढ़ जाता है। शरीर पर लाल चकत्ते भी बन जाते हैं। यह सबसे पहले पैरों पर, फिर छाती तथा कभी-कभी सारे शरीर पर फैल जाते हैं। डेंगू बुखार में रक्त में प्लेटलेट्स की संख्या कम हो जाती है और नब्ज का दबाव भी कम (20 मिमी एचजी दबाव से कम) हो जाता है। डेंगू से संक्रमित व्यक्ति में लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, भूख न लगना, पेट खराब होना, खूनी दस्त होना और खून की उल्टी होना आदि लक्षण शामिल हैं।
कोट
डेेंगू से निबटने के लिए जिला और सीएचसी पर वार्ड की व्यवस्था कर ली गई है। कोरोना के लिए बने वार्ड को सैनिटाइज और साफ सफाई के साथ डेंगू वार्ड के लिए सुरक्षित कर लिया गया है। साथ ही डेंगू के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष फिलहाल एक संदिग्ध मरीज पाया गया है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की ओर से दवाओं का भी छिड़काव किया जाता है। डॉक्टर जेपी सोनकर, जिला मलेरिया अधिकारी।
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