धीना। देश की अधिकांश जनता हिंदी बोलती और समझती है। लेकिन इसे और अधिक सम्मान दिलाने की आवश्यकता है। विदेशों में हिंदी का प्रसार बढ़ रहा है। जिले में भी शिक्षक हिंदी के प्रचार प्रसार में लगे हैं। उनका कहना है कि हिंदी में हमारी संस्कृति और सभ्यता झलकती है। आवश्यकता है कि इसका अधिक से अधिक प्रसार हो।
हम अपने भावों को हिंदी में प्रभावशाली तरीके से व्यक्त कर सकते हैं। क्षेत्रीय भाषाओं के साथ इसका घनिष्ठ संबंध है। ऐसे में हिंदी देश की राष्ट्रभाषा घोषित होने के योग्य है। हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित कर इसका सम्मान बढ़ाया जा सकता है। हालांकि पूरे विश्व में हिंदी का मान बढ़ा है और आज सबसे अधिक बोली और समझी जाने वाली भाषा हिंदी है लेकिन इसे विश्व की संपर्क भाषा बनाने के लिए हम सभी को आगे आने की जरूरत है। जिससे हम लोगों का सम्मान बढ़े।
डॉ. पूर्णमासी राय
पूर्व प्रोफेसर एवं अध्यक्ष, संकायाध्यक्ष (डीन), हिंदी विभागमगध यूनिवर्सिटी, बोधगया, बिहार
भारत की स्वतंत्रता आंदोलन में भी हिंदी का अहम योगदान रहा है। देश के विभिन्न राज्यों के रहने वाले और अन्य भाषाओं के जानकार लोगों ने भी हिंदी को देश मेें एक सूत्र में पिरोने वाली भाषा के रूप में इसे स्वीकार किया। यह अलग बात है कि अब तक हिंदी को देश के राष्ट्रीय भाषा का दर्जा नहीं मिल सका है लेकिन हिंदी का महत्व किसी से छिपा नहीं है। आज पूरे विश्व में हिंदी बोली और समझी जा रही है, लेकिन भारत में युवा हिंदी बोलने और लिखने में हिचक रहे हैं। इसके लिए हिंदी को काम काज की भाषा बनाने की जरूरत है। इसके लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाना होगा। जिससे युवाओं का आकर्षण हिंदी के प्रति बढ़े।
डॉ. हरेन्द्र राय
सदस्य उप्र माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, प्रयागराज