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कलयुगी पुत्र ने ही साथी संग मिलकर की थी पिता की हत्या

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पिता की हत्या की
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मुगलसराय। पन्द्रह अगस्त को अलीनगर थानांतर्गत तारनपुर दुधाने गांव के समीप हुई अरविंद यादव की हत्या उसके पुत्र ने ही साथी के साथ मिलकर की थी। यह खुलासा शुक्रवार की शाम पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने क्षेत्राधिकारी सदर कार्यालय में किया।उन्होंने बताया कि पुलिस ने हत्या के मामले में उसके पुत्र सोनू यादव सहित दो साथियों को गिरफ्तार किया है। इस घटना में शामिल लालू यादव नामक एक अन्य अभियुक्त पुलिस की गिरफ्त से दूर है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो तमंचा, दो कारतूस, दो मोबाइल व एक मोटर साइकिल बरामद की है। पिता की हत्या के लिए सोनू ने लालू से तीन लाख रुपये में सौदा तय किया था।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि अरविंद यादव की हत्या की घटना का खुलासा करने के लिए सीओ सदर त्रिपुरारी के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच प्रभारी साजिद सिद्दकी व अलीनगर थाना प्रभारी अतुल नारायण सिंह व कुछ पुलिसकर्मियों के साथ एक टीम का गठन किया गया। पुलिस परिवार के लोगों की भूमिका की जांच करने लगी तो ज्ञात हुुआ कि उसके पुत्र सोनू यादव ने अपने मित्रों के साथ मिलकर पिता की हत्या की है। शुक्रवार को पुलिस को सूचना मिली की सोनू बाइक से अपने साथियों के साथ बलुआ होते हुए गाजीपुर भागने के फिराक में है। पुलिस ने सोनू व उसके साथी महावीर यादव पुत्र रामयश यादव,एवं दीपक यादव पुत्र प्यारेलाल यादव को कुरहना गांव के समीप से पकड़ लिया। अलीनगर थाना में लाकर सोनू यादव से पूछताछ की गई तो उसने पिता की हत्या करने की बात कबूल की। बताया कि पिता अरविंद यादव की हत्या उसने भाड़े के सुपारी किलर लालू यादव के साथ मिलकर की थी। बताया कि लालू से उसकी मुलाकात महावीर ने कराई थी और पंद्रह अगस्त को जब उसके पिता मुगलसराय कोतवाली से निकले तो उसके दोस्त महावीर और दीपक उनकी लोकेशन देने लगे। इसके बाद जैसे ही वह तारनपुर दुधाने गांव के समीप पहुंचे तभी सुनसान स्थान पाकर पहली गोली लालू यादव ने मारी इसके बाद पिता पर सोनू ने भी गोली चला दी। इसके बाद वहां से फरार हो गए।
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मुगलसराय। बाइस बिस्वा जमीन को बिकने से बचाने, बहन की शादी में पिता द्वारा अनदेखी किए जाने और परिवार से पंद्रह सालों तक दूर रहने व लोगों का ताना सुन सोनू यादव काफी अवसाद में था। पिता को मारने के लिए उसने बहुत बड़ा निर्णय लिया। तीन लाख की सुपारी हत्या करने के लिए तय की गई थी। जिसमें साठ हजार रुपये की अदायगी भी हो चुकी थी।
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सोनू यादव अपने पिता अरविंद यादव के व्यवहार से इतना खिन्न था कि उसने खुद भी पिता पर गोली चलाने से गुरेज नहीं किया। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन अपने पिता की हत्या करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसने अपने इरादे जाहिर करते हुए बताया कि वह पिता को ईद से पहले ही खत्म कर देना चाहता था लेकिन योजना विफल हो गई। लेकिन वह लगातार पिता को दुनिया से हटाने के लिए लगा रहा। हत्या के बावजूद उसके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। पिता की बेवफाई का दर्द ने उसे हत्यारा बना दिया। उसके मन में उसी दिन आक्रोश पनप गया था जब वह बहन की शादी करने के लिए कर्ज भी लिया था और परिवार की भरण पोषण दूध बेचकर करता था। जब उसके जेहन में यह जानकारी आई की 23 बिस्वा गांव की जमीन अरविंद यादव के नाम है और वह उसे कभी भी बेच सकता है तो वह मन ही मन कुंठित होने लगा था। अपने पिता का इकलौता पुत्र होने के बावजूद उसने आगे पीछे कुछ नहीं देखा। शायद उसे अब यह एहसास हो गया था कि पिता के होने के बावजूद उनका कोई भी महत्व उसके जीवन में रह गया था। पंद्रह सालों तक पिता के प्यार के लिए तड़प रहा सोनू अंतत. उनकी हत्या कर ही अपनी तड़प की प्यास बुझाया।
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