फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अब आरपीएफ एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज करेगी मुकदमा

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
पीडीडीयू नगर। ट्रेनों में मादक पदार्थों की तस्करी और इसके सेवन पर रोक लगाने में आरपीएफ सशक्त भूमिका निभाएगी। इसके लिए रेलवे सुरक्षा बल को जांच के विशेष अधिकार मिल गए हैं। 11 अप्रैल को वित्त मंत्रालय (राजस्व विभाग) ने अधिसूचना जारी की है। इस अधिकार के बाद आरपीएफ शक होने पर जांच कर नशीले पदार्थों को बरामद कर सकती है। अब तक मादक पदार्थों की जांच और बरामदगी की जिम्मेदारी सिर्फ जीआरपी के पास थी।
ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों पर सुरक्षा और जांच की जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार मिलकर लेती है। ट्रेनों में होने वाले आपराधिक घटनाओं को रोकने के लिए राज्य पुलिस ने अपनी विशेष शाखा राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) का गठन की है। ट्रेनों में लूट पाट, मारपीट, हत्या, तस्करी आदि की जांच जीआरपी करती रही है। वहीं रेलवे संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी रेलवे की अपनी सशस्त्र बल रेलवे सुरक्षा बल(आरपीएफ) उठाती रही है। बेटिकट यात्रियों की धड़कपड़ के साथ रेल संपत्ति की चोरी आदि की रोक की जिम्मेदारी आरपीएफ उठाती रही है। ट्रेनों में आपराधिक घटनाएं होने पर आरपीएफ हस्तक्षेप करती थी लेकिन मामला जीआरपी को दे देती है। लंबे समय से आरपीएफ को अधिक अधिकार देने की मांग की जाती रही है। इसके तहत ही अब वित्त मंत्रालय ने द नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 42, द नार्कोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 की धारा 67 के तहत कार्रवाई का अधिकार आरपीएफ को दी है। इसके तहत आरपीएफ के सहायक उपनिरीक्षक से ऊपर के अधिकारी जांच कर सकते हैं और मादक पदार्थ बरामद होने पर तस्कर, विक्रेता को गिरफ्तार कर मुकदमा दर्ज करेंगे और जांच करेंगे। इस संबंध में वरीय मंडल सुरक्षा अधिकारी आशीष मिश्र ने बताया कि इससे ट्रेनों से मादक पदार्थों की तस्करी पर बहुत हद तक रोक लग सकेगी।
विज्ञापन
विज्ञापन


पीडीडीयू नगर। हावड़ा दिल्ली रूट मादक पदार्थों की तस्करी के लिए बदनाम रहा है। गांजा, भांग के साथ हेरोइन, चरस, अफीम के साथ सोना चांदी, असलहे और कछुओं की खूब तस्करी होती रही है। यदि पांच वर्ष में देखे तो स्थानीय रेलवे स्टेशन पर जीआरपी ने पचास किलो से अधिक अफीम सहित अन्य मादक पदार्थ बरामद कर चुकी है। आए दिन जहरखुरान गिरोह के सदस्यों को पकड़ कर दो से तीन सौ ग्राम डायजापाम आदि बरामद करती रही है। तीन वर्ष पहले पश्चिम बंगाल के मालदा में अफीम की खेती को सीमा सुरक्षा बल ने नष्ट किया। इसके बाद कुछ हद तक रोक लगी। हालांकि गांजा सहित अन्य नशीले पदार्थों की तस्करी हो रही है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें