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लॉकडाउन में कर्मकांड से जुड़े ब्राह्मणों की स्थिति रही खराब

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पीडीडीयू नगर। कोरोना संक्रमण काल में लॉक डाउन ने समाज के हर वर्ग को प्रभावित किया है। एक ओर जहां छोटे बड़े व्यवसाई कारोबार में हुए नुकसान को लेकर चिंतित रहे वहीं दूसरी तरफ कर्मकांड से जुड़े ब्राह्मणों की स्थिति भी काफी खराब रही। लॉकडाउन में शादी-विवाह नहीं होने व मंदिरों के बंद रहने के कारण इनके समक्ष पेट भरने का संकट खड़ा हो गया था। छोटी-छोटी पूजा कराकर किसी प्रकार दो महीने का वक्त बीता है। अब जब लॉकडाउन में जिला प्रशासन की ओर से ढील दी गई है तो इन्हें उम्मीद है कि इनकी भी जिंदगी पटरी पर लौट आएगी।
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देशभर में 25 मार्च से लागू हुए लॉकडाउन के साथ ही नियमों की सख्ती के कारण लोगों के रोजी-रोजगार पर पहरा लग गया। यहां तक शादी-विवाह के लॉन बंद हो तो वहीं मंदिरों पर भी ताला लटक गया। इसके साथ ही इनसे जुड़े लोगों का जीवन भी प्रभावित हो गया। दो महीने तक ढील नहीं मिलने के कारण लोगों के सामने जीवकोपार्जन का संकट खड़ा गया था। इसमें कर्मकांड से जुड़े ब्राह्मणों की स्थिति भी काफी खराब रही। मंदिर में पूजा करने और शादी-विवाह के दौरान मिलने वाली दक्षिणा ही इनके जीवकोपार्जन का प्रमुख जरिया लेकिन लॉकडाउन के कारण सब कुछ बंद हो गया। कुंज बिहारी मिश्रा ने कहा कि लॉकडाउन में मंदिरों में भी ताला लटक गया था। इसके कारण इन पर आश्रित लोगों के लिए जीवकोपार्जन के लिए समस्या खड़ी हो गई थी। अंकुर दुबे ने कहा कि कोरोना संक्रमण के कारण कई लोगों ने घरों पर भी पूजा नहीं कराई। पूजा-पाठ नहीं होने से आय प्रभावित रही। संतोष तिवारी ने कहा कि धार्मिक कर्मकांड पर आधारित लोगों के जीवन पर लॉकडाउन ने बुरा प्रभाव डाला है। कमल का कहना है कि लॉकडाउन में पूजा पाठ न होने से कॉफी दिक्कते हुए हैं।
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