रेलवे फ्रेट कॉरिडोर परियोजना से प्रभावित किसानों और जिला प्रशासन के बीच बुधवार को कलेक्ट्रेट में बैठक हुई। इसमें किसानों ने भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजा और रेलवे में नौकरी की मांग को दोहराया। जिला प्रशासन ने नौकरी का प्रावधान नहीं होने की बात किसानों से कही। लेकिन किसान इस बात को मानने को तैयार नहीं थे। जिलाधिकारी ने समस्या के निराकरण के लिए किसानों और रेल अधिकारियों की संयुक्त बैठक कराने का भी भरोसा दिलाया। लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़े रहे।
भूमि अधिग्रहण के बदले उचित मुआवजा व नौकरी की मांग को लेकर किसानों का धरना प्रदर्शन 165 दिनों से लगातार चल रहा है। इस दौरान धरनारत किसानों को मनाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन किसान अपनी जिद पर अड़े रहे। बीच-बीच में किसानों ने आंदोलन को धार दी, लेकिन उनकी मांगो पर सहमति नही बनी। इसके बाद तहसीलदार सदर बीते दिनों किसानों के धरनास्थल छितो गांव पहुंचे और किसानों की समस्या को गंभीरता से सुना। इसके बाद उन्होंने जिला प्रशासन और किसानों की बैठक कराने की योजना बनाई। तहसीलदार सदर की पहल का ही परिणाम रहा कि किसान बुधवार को कलेक्ट्रेट में आयोजित बैठक में शामिल हुए और अपनी मांगों को पुरजोर ढंग से रखा। इस दौरान शशिकांत कुशवाहा, अनिल पासवान, शशिकांत सिंह, किस्मत यादव आदि मौजूद रहे।