तालाब पर घाट पर नाम लिखकर स्थान छेकते युवा।
सरोवरों में गंदगी के बीच छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हंै। सरोवरों पर व्रतियों ने घाट छेंकना भी शुरू कर दिया है। घरों में भी छठी मइया के गीत गूंजने लगे हैं। वहीं व्रत के मद्देनजर स्टेशन पर काफी भीड़ दिखने लगी है।
लोक आस्था का महापर्व डाला छठ का महत्व अत्यधिक बढा है। यही कारण है कि कभी बिहार का महापर्व उत्तर प्रदेश का भी महत्वपूर्ण त्योहार हो गया है। इस वर्ष चार दिवीसय डाला छठ की शुरूआत शुक्रवार को होगा। नहाय खाय के बाद शनिवार को बखीर का भोग लगाया जाएगा और रविवर की शाम डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। सोमवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाएगा। दीपावली समाप्त होते ही डाला छठ की तैयारी शुरू हो गई है। अत्यंत स्वच्छता व शुद्धता के साथ मनाये जाने वाले इस पर्व को लेकर उत्साह का माहौल है। अभी तक तालाबों की साफ सफाई नहीं की गई है। कुछ युवा समाज सेवियों ने अपने स्तर से साफ सफाई की है लेकिन अभी भी घाटों पर गंदगी का माहौल है। नगर के मानसनगर स्थित मानसरोवर तालाब, नई बस्ती स्थित दामोदरदास पोखरा, आरपीएफ कालोनी, सिकटिया सहित अन्य स्थलों पर बड़े पैमाने पर डाला छठ के व्रती अर्घ्य देने के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में समय कम होने की वजह से लोग घाटों पर पहुंच कर रंग रोगन कर और अपना नाम लिख कर घाट छेंकने लगे हैं। वहीं पर्व के मद्देनजर दूसरे राज्यों में काम के लिए गए लोगों केआने का सिलसिला शुरू होने की वजह से ट्रेनों की भीड बेकाबु हो रही है।