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इवी की ब्रिकी पर चार्जिंग स्टेशन का ब्रेक : दो साल में बिकी सिर्फ 31 कारें, 776 स्कूटी

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देश में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बदल रहा है। बड़े शहरों में कम प्रदूषण और कम रनिंग कॉस्ट के चलते लोग इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। लेकिन छोटे शहरों में अब भी इलेक्ट्रिक व्हीकल के नाम पर केवल ई-रिक्शा की बिक्री ज्यादा है। चार्जिंग स्टेशन न होने और लंबी दूरी को लेकर संशय और वाहन के चार्जिंग के लिए लगने वाली बिजली बिल आदि की समस्याओं के कारण इलेक्ट्रिक व्हीकल खरीदने से कतरा रहे हैं। जिले भर में कुल 3532 इलेक्ट्रिक व्हीकल में केवल 31 कार और 776 स्कूटी हैं। जिसमें 2103 ई-रिक्शा, 85 तीन पहिया वाहन, 537 माल ढुलाई वाले ई-रिक्शा हैं। इस लिहाज से देखा जाए तो जिले में लोग इलेक्ट्रिक स्कूटी तो खरीद रहे हैं, लेकिन कार खरीदने के पहले अपना गुणा-भाग लगा रहे हैं। बीते दो साल के भीतर करीब 70 फीसदी इलेक्ट्रिक स्कूटी खरीदी गई है।
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क्या बोले विशेषज्ञ
राजकीय आईटीआई कॉलेज पिपरिस के इलेक्ट्रिक शिक्षक शिवम दुबे ने बताया कि पर्यावरण के दृष्टिकोण इलेक्ट्रिक वाहनों का कोई तोड़ नहीं है, लेकिन इनके साथ कुछ व्यवहारिक दिक्कतें आ सकती हैं। इसमें चार्जिंग पाइंट के अलावा पर्याप्त एवरेज आदि की चीजें शामिल हैं। बताया कि इलेक्ट्रिक वाहन सामान्य वाहन से थोड़ा महंगा होता है। इसके अलावा उसे चार्ज करने के लिए बिजली की जरूरत होगी। ऐसे में अगर कोई वाहन खरीदता है तो दोनों कसौटियों पर कसने के बाद ही खरीदेगा। खासकर लंबी दूरी में इलेक्ट्रिक व्हीकल का प्रयोग अब भी थोड़ा संशय है। नजदीकी सेंटरों पर भी अगर हर दिन चलना है तो इलेक्ट्रिक व्हीकल एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आ रहा है।


वर्जन

पहले की अपेक्षा इलेक्ट्रिक व्हीकल की मांग बढ़ी है। भदोही में इलेक्ट्रिक स्कूटी अधिक बिकी है। वहीं कारों की संख्या अब तक केवल 31 हैं। लोग इलेक्ट्रिक व्हीकल को लेकर धीरे-धीरे आकर्षित हो रहे हैं। - राम सिंह, एआरटीओ
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