चंदौली जिले को धान का कटोरा कहा जाता है। जिले में धान की नर्सरी डालने का समय शुरू हो चुका है, लेकिन यहां कि 663 नहरें और माइनर अभी भी सूखी पड़ी हैं। एक ओर तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, दूसरी ओर नहरों में पानी नहीं होने से किसानों के सामने धान की नर्सरी तैयार करने का संकट खड़ा हो गया है। खेतों में नमी नहीं है, सब्जियों की फसल प्रभावित हो रही है और पशु-पक्षियों के सामने भी पानी का संकट गहरा गया है।
करीब 21 लाख आबादी वाले कृषि प्रधान जिले में 1.76 लाख लघु एवं सीमांत किसान तथा 11,500 बड़े किसान खेती पर निर्भर हैं। जिले में लगभग 1.27 लाख हेक्टेयर भूमि पर खरीफ और रबी फसलों की खेती होती है। धान उत्पादन के लिए पहचान रखने वाले जिले में हर वर्ष करीब पांच लाख मीट्रिक टन धान का उत्पादन होता है। ऐसे में नर्सरी के समय नहरों का सूखा रहना किसानों की चिंता बढ़ा रहा है।
कर्मनाशा, लतीफशाह बीयर, चंद्रप्रभा बांध प्रणाली और नरायनपुर लिफ्ट कैनाल से निकली 663 नहरों और माइनरों का करीब 856 किलोमीटर लंबा नेटवर्क जिले की सिंचाई व्यवस्था का आधार माना जाता है। फिलहाल अधिकांश नहरें सूखी हैं। सिंचाई विभाग के अनुसार पांच जून के बाद नहरों में पानी छोड़े जाने की योजना है, जबकि किसान अभी से पानी की मांग कर रहे हैं।
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इनसेट
झाड़ियों और गाद से पटीं माइनरें
कमालपुर, बरहनी, बबुरी, टांडा कला, धीना और नरवन क्षेत्र में किसानों ने नर्सरी की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन खेतों में पानी नहीं है। जिन किसानों के पास निजी ट्यूबवेल और पंपसेट हैं, वे डीजल के सहारे सिंचाई कर रहे हैं, जबकि छोटे किसान सरकारी नहरों पर निर्भर हैं। किसानों का आरोप है कि महुवर, कैथी, फूलवरिया और पहाड़पुर क्षेत्र की कई माइनरों की समय पर सफाई नहीं कराई गई। कई स्थानों पर गाद और झाड़ियां भरी हैं, जिससे पानी पहुंचने में देरी की आशंका है।
केस-1 :
डीजल पंपों के सहारे खेती
कंदवा क्षेत्र में नरायनपुर से निकली अमड़ा बड़ी नहर में गेहूं कटाई के बाद अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है। नरवन क्षेत्र के किसान धान की नर्सरी की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन पानी नहीं मिलने से निजी संसाधनों और डीजल पंपों पर निर्भर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है।
केस-2 : सब्जी, मूंग और गन्ने पर असर
कमालपुर क्षेत्र में पानी के अभाव का असर सब्जी, मूंग, चरी और गन्ने की फसल पर भी दिखने लगा है। किसान रामेश्वर सिंह ने बताया कि समय पर पानी मिलने पर ढैंचा की बुवाई संभव होती। वहीं डेढ़गांवा के किसान दयाल शरण ने बताया कि मूंग की फसल सूखने लगी है।
केस-3 : लू और बिजली कटौती से बढ़ी परेशानी
बबुरी क्षेत्र में किसानों को गर्मी और बिजली कटौती दोनों का सामना करना पड़ रहा है। किसान प्रमोद मौर्य ने बताया कि नर्सरी में डाला गया पानी कुछ घंटों में सूख जा रहा है। रात में बिजली कटौती के कारण सिंचाई भी प्रभावित हो रही है। किसान नेता विमल सिंह ने कहा कि जल्द पानी नहीं मिला तो धान की रोपाई प्रभावित हो सकती है।
लोगों से बात
धान की नर्सरी डालने का समय हो गया है, लेकिन नहर में पानी नहीं है। डीजल पंप से सिंचाई करने में काफी खर्च आ रहा है।
वेदप्रकाश राय, कंदवा
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नरवन क्षेत्र पूरी तरह खेती पर निर्भर है। नहर सूखी रहने से धान और सब्जी दोनों की खेती प्रभावित हो रही है।
धर्मेंद्र सिंह, असना
महंगे डीजल के कारण सिंचाई करना मुश्किल हो गया है। अगर जल्द पानी नहीं आया तो धान की बुवाई पिछड़ जाएगी।
-मनीष सिंह, जमुड़ा
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हर साल इस समय तक नहर में पानी आ जाता था। इस बार विभाग की लापरवाही से किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
-रमेश राय, कंदवा
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कोट
15 जून से नर्सरी के लिए नहरों में पानी छोड़ा जाएगा। यह व्यवस्था जून के अंतिम सप्ताह तक चलेगी। जहां चंद्रप्रभा और गड़ई नदी की खुदाई चल रही है, वहां पानी पहुंचने में विलंब हो सकता है। जुलाई में सिंचाई के लिए नहरें संचालित की जाएंगी।
— हरेंद्र कुमार, एक्सईएन, चंद्रप्रभा प्रखंड, सिंचाई विभाग