पीडीडीयू नगर। देश की आजादी के लिए पटना के बख्तियारपुर थाने को फूंकने और जेल की सजा काटने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वाचस्पति मिश्र पंचतत्व में विलीन हो गए। बृहस्पतिवार को वाराणसी के मर्णिकर्णिका घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि उनके बड़े बेटे रजनीकांत मिश्र ने दी। इससे पहले सुबह कैलाशपुरी स्थित उनके आवास पर उन्हें पुलिस और प्रशासन की ओर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान काफी संख्या में बुद्धिजीवी, राजनीतिज्ञ एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।
वाचस्पति मिश्र बुधवार की शाम 90 साल की आयु में रेलवे अस्पताल में निधन हो गया था। बुधवार को ही सुबह उनकी तबियत खराब होने पर उन्हें रेलवे अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
बृहस्पतिवार को कैलाशपुरी स्थित आवास पर नायब तहसीलदार ध्रुव सिंह, कोतवाल शिवानंद मिश्रा, एसआई विपिन सिंह सहित पुलिसकर्मियों ने सलामी दी। इस दौरान चेयरमैन संतोष खरवार, भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष राणा प्रताप सिंह, पूर्व प्रमुख बाबूलाल यादव, रामजी गुप्ता, अशोक यादव, भानु तिवारी, संतोष तिवारी, चंद्रकांत उर्फ डब्बा तिवारी, शाहिद तौसीफ, विक्की जुनेजा, संजय सिंह सहित काफी संख्या में लोग मौजूद रहे। वाचस्पति मिश्र का जन्म वर्ष 1929 में बिहार के बख्तियारपुर जिले के रवाइच गांव में हुआ था। युवावस्था में गांधी जी के करो या मरो आंदोलन से प्रभावित होकर 1945 मे वाचस्पति मिश्र ने युवा टोली के साथ बख्तियारपुर थाने पर हमला बोल दिया और अंग्रेज थानाध्यक्ष की हत्या कर दी और थाने को फूंक दिया था। मुकदमा दर्ज हुआ और जेल भी गए। तीन माह तक गांधी जी के सानिध्य में रहते हुए वे पूरी तरह गांधीवादी हो गए। आजादी के बाद वाचस्पति मिश्र को रेलवे विभाग में नौकरी मिल गई। पीडीडीयू नगर के रेलवे लोको अस्पताल फार्मासिस्ट के पद पर पहुंचे और यही से सेवा निवृत्त हुए। यही कैलाशपुरी में इन्होंने मकान बनवाया और यहीं बस गए। वाचस्पति मिश्र की पत्नी सुमित्रा देवी की मौत वर्ष 2008 में हो गई थी। अपने पीछे तीन बेटे क्रमश रजनीकांत मिश्र, राजकुमार मिश्र, रमाकांत मिश्र बेटी, प्रभा मिश्र सहित बहु, पौत्र-पौत्रियों से सहित सहित भरा पूरा परिवार को छोड़ गए हैं।