चंदौली। कोटे की दुकानों पर गरीबों को समय से अनाज का वितरण हो सके, वितरण में धांधली पर नकेल लगे इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की गई। ई-पॉश की शुरूआत के बाद शासन ने डोर स्टेप डिलीवरी की व्यवस्था लागू कर दी ताकि अनाज समय से कोटे पर पहुंचने के बाद राशनकार्ड धारक को उसके हिस्से का पूरा अनाज मिले। लेकिन यहां भी खेल शुरू हो गया है। अब रजिस्टर में नहीं बल्कि चालान पर हेराफेरी कर गरीबों को मिलने वाले अनाज पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है। डोर स्टेप डिलिवरी के नाम पर ऐसा ही मामला चहनिया में कोटे की दुकान पर राशन भेजने में हुआ है। अफसरों द्वारा काटे गए चालान में कही गेहूं और चावल का वजन नहीं है तो कहीं वाहन संख्या ही गायब है या फिर कोटेदार का नाम चालान पर नहीं है।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत कोटेदारों के माध्यम से राशनकार्ड धारकों को सस्ता अनाज उपलब्ध कराया जाता है। इसके लिए पहले कोटेदार चालान के माध्यम से आवंटित खाद्यान्न लेने के लिए निर्धारित धनराशि बैंक में जमा करता है। फिर खाद्य विपणन विभाग के गोदाम से डोर स्टेप डिलिवरी योजना के तहत अनुबंधित ठेकेदार उसके दुकान पर अपने वाहन से खाद्यान्न पहुंचाता है। इसके बदले ठेकेदारों को विभाग द्वारा खाद्यान्न ढ़ुलाइ के लिए भाड़े का भुगतान किया जाता है। परन्तु जिले में डोर स्टेप डिलिवरी के नाम पर अधिकारियों, कर्मचारियों और ठेकेदारों की मिली भगत से धांधली करने का मामला उजागर हुआ है। हाल ही में 24 नंवबर को चहनिया स्थित खाद्य विपणन विभाग के गोदाम से कोटेदारों के दुकान पर खाद्यान्न भेजने के लिए काटे गए चालान में हुई गड़बड़ी ने अफसर की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए है। एक चालान पर कोटेदार के यहां भेजे गए खाद्यान्न की मात्रा गायब है तो दूसरे पर वाहन का नंबर दर्ज करने की जरुर नहीं समझा गया है। ऐसे में खाद्यान्न कोटेदार के यहां गया है या कहां पहुंच गया इसका लेखा-जोखा किसी के पास नहीं है। हालांकि दोनों चालानों पर कोटेदारों से हस्ताक्षर जरुर करा लिया गया है। लेकिन यह समझ के परे है कि जब चालान पर खाद्यान्न की मात्रा दर्ज नहीं है तो कोटेदार ने कैसे हस्ताक्षर कर दिया। इससे शासन की पारदर्शिता पर विभागीय अफसर, कोटेदार और ठेकेदार सवाल खड़े कर रहे हैं।
क्या है डोर स्टेप डिलिवरी
उपभोक्ताओं को खाद्यान्न वितरण के लिए कोटेदार पहले खुद के वाहन से सरकारी गोदाम से अनाज का उठान करते थे। लेकिन दो महीने से शासन ने डोर स्टेप डिलिवरी की व्यवस्था लागू की है। इस व्यव्सथा के तहत विभाग से अनुबंधित ठेकेदार के माध्यम से कोटेदार की दुकान पर खाद्यान्न का डिलिवरी कराई जाती है। इसमें माल ढ़ुलाई के भाड़े का भुगतान संबंधित ठेकेदार को किया जाता है
राशनकार्ड धारक हैं जिले में
जिले में 868 कोटे की दुकान है। यहां से पात्र गृहस्थी योजना के तहत 294982 और अंत्योदय योजना के तहत 52495 राशनकार्ड धारक हैं। सभी कार्ड धारक आवंटित नजदीक के कोटे की दुकान से हर महीने राशन उठाते हैं।
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आरएफसी गोदाम से खाद्यान्न उठान और डिलिवरी करने के दौरान चालान काटने में गड़बड़ी का मामला संज्ञान में आया है। मामले को उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। पूरे प्रकरण की जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अनूप श्रीवास्तव, जिला खाद्य विपणन अधिकारी