भाजपा अपने होमवर्क के बलबूते अधिकांश जिला पंचायत सीट पर जीत दर्ज करने का सपना संजोए हुई थी। पिछले तीन महीने की कवायद के बावजूद भाजपा महज आठ सीटों पर सिमट कर रह गई। रणनीतिकार मानते हैं कि सबकी नजर निर्दलियों पर है, इतना तय है कि निर्दलियों की कृपा जिस पर बरसेगी, अध्यक्ष का सेहरा उसी के सिर सजेगा। वैसे भी जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में आजतक एक धनबली और एक बाहुबली पर्दे के पीछे से एक दूसरे को मात देने की कोशिश करते है। अनुमान है कि इस बार भी ऐसा कुछ देखने को मिल सकता है।