कंदवा। यज्ञ मंडप की परिक्रमा करने वाले भक्त की सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। जब भक्त संकल्पित होकर याचना करता है, तो भगवान को हर हाल में उसे पूरा करना पड़ता है। यह बातें कामख्या तंत्र आश्रम गायघाट वाराणसी के महंत चंद्रमौलि मुनि उदासीन खड़ेश्वरी बाबा ने मां भवानी प्राकट्य स्थल कसवढ़ डेहरियाडीह परिसर में चल रहे रुद्रचंडी महायज्ञ के चौथे दिन शुक्रवार को कहीं। कहा कि महायज्ञ का आयोजन होने से सर्व देवी देवता व सारे तीर्थ विराजमान होते हैं। शास्त्रोक्त इस आधार से यज्ञ मंडप परिक्रमा करने से मनोवांछित फल मिलता है। हिंदू शास्त्र में मंडप परिक्रमा के संबंध में वर्णित है कि यम यम चिंतयते कामम, तम तम प्राप्नोति निश्चितम। अर्थात जो व्यक्ति जिस कामना लेकर परिक्रमा करता है वह वैसा ही प्राप्त करता है। वैदिक काल से ही देवी देवता का परिक्रमा करने का सिद्धांत शुरू हुआ है।