दुलहीपुर स्थित करबला (शकूर का भट्ठा) के समीप गत रविवार को मकान ढहने की
घटना के तीसरे दिन मंगलवार को दोपहर कमिश्नर राधेमोहन श्रीवास्तव और डीआईजी
वाराणसी रेंज शुभेंदु कुमार भगत मौके पर पहुंचे।
उन्होंने पीड़ित
परिवार के दोनों लड़कों अलमगार और गमखार को ढांढस बंधाया। साथ ही मलबे का
सैंपल लेकर गुणवत्ता परीक्षण के लिए भेजने का निर्देश दिया। इस दौरान इस
तरह के अन्य स्थानीय मकानों की सूची भी जिला मुख्यालय भेजने का निर्देश
दिया।
घटनास्थल पर कमिश्नर आरएम श्रीवास्तव से स्थानीय लोगों ने बताया
कि मकान निर्माण में घटिया सीमेंट और बालू का इस्तेमाल किया गया था। जो
इतने बडे़ हादसे का कारण बना।
इस शिकायत पर कमिशभनर ने मलबे का सैंपल
निकलवाया और सीमेंट की गुणवत्ता परीक्षण के लिए लैब में भेजने का निर्देश
दिया।
उन्होंने कहा कि अगर मानक के अनुरूप निर्माण नहीं हुआ होगा, तो मकान
मालिक पर भी मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। कहा कि पीड़ित परिवार को बुनकर राहत
कोष व मुख्यमंत्री राहत कोष से अधिक से अधिक लाभ दिलाने का प्रयास होगा।
डीआईजी एसके भगत ने कहा कि मकान बनाना तो आसान है लेकिन मकान में सीमेंट
बढ़िया लगाया जाना चाहिए। लोगों ने बताया कि कई और मकान भी इस तरह के हैं।
तब कमिश्नर और आईजी ने कहा कि ऐसे मकानों की सूची बनाकर जिला प्रशासन को
भेजी जाए, ताकि उनकी गुणवत्ता की जांच भी की जा सके। जिलाधिकारी एनके सिंह
ने कहा कि पीड़ित के मकान निर्माण के लिए शासन को नक्शा बनाकर भेज दिया गया
है।
पीडब्लूडी के इंजीनियर को निर्देशित किया गया है कि सात दिन के अंदर
मकान का निर्माण कार्य आरंभ कर दें। कमिशभनर ने लोगों से कहा कि सभी मिलकर
पीड़ित परिवार की मदद करें। ताकि पीड़ित परिवार को प्रशासनिक मदद की जरूरत
ही न पड़े।