मुख्यालय स्थित कैंप कार्यालय पर सोमवार को ईंट निर्माता समिति की बैठक हुई। इसमें संगठन सहित तमाम बिंदुओं पर चर्चा की गई।
इस
दौरान ईंट भट्ठा स्वामियों ने सरकार की ओर से जारी किए गए स्वच्छता प्रमाण
पत्र की अनिवार्यता पर गहनतापूर्वक विचार-विमर्श किया। साथ ही केंद्र व
प्रदेश सरकार से मांग किया कि ईंट निर्माताओं को कारोबार करने में सहूलियत
दी जाए, ताकि ईंट भट्ठा कारोबार पर मंडरा रहे संकट के बादल दूर हो सकें।
इस
अवसर पर महामंत्री रतन कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि पर्यावरण स्वच्छता
प्रमाण पत्र अनिवार्य किए जाने से भट्ठों का संचालन करना मुश्किल हो रहा
है। स्वच्छता प्रमाण पत्र की आड़ में ईंट भट्ठा स्वामियों का आर्थिक व
मानसिक शोषण किया जा रहा है। इसे बनवाने में तीन से चार माह का समय लग
जाएगा, जिसे बनाने में जिला प्रशासन स्तर पर कोई व्यवस्था नहीं की गई है और
न ही अभी तक कमेटी का गठन हो पाया है।
इस व्यवस्था में ईंट-भट्ठा
स्वामियों को तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य
सरकार तत्काल पर्यावरण स्वच्छता प्रमाण पत्र आवेदन लेकर प्रमाण जारी करे,
ताकि ईंट-भट्ठा स्वामियों को राहत मिल सके। कहा कि ईंट का सीजन खत्म होने
में तीन माह शेष रह गए है।
यदि जल्द जिला प्रशासन ने ठोस पहल नहीं की गई तो
ईंट भट्ठा बंद हो जाएंगे, जिससे इन उद्योग पर आश्रित मजदूरों को रोटी के
लिए दर-दर भटकना पड़ेगा।
इस अवसर पर प्रकाश सिंह, रामजन्म मौर्या, निरंजन
सिंह, ओमप्रकाश सिंह, गोपाल सिंह, मंगला सिंह, अशोक सिंह, राजेश कुमार,
मुन्न सिंह आदि उपस्थित रहे। अध्यक्षता रामगोपाल सिंह व संचालन शिवकुमार
मौर्य ने किया।