समायोजन रद्द किए जाने के बाद शिक्षामित्रों ने मंगलवार को दूसरे दिन अंितम दम तक संघर्ष का ऐलान किया। कार्य बहिष्कार किया।
वे
विद्यालयों पर पहुंचे और हस्ताक्षर बनाकर चले गए।
बाद में शिक्षामित्रों
ने जगह जगह सभा कर शिक्षामित्रों के समायोजन को रद्द किए जाने को एकतरफा
कार्रवाई बताया। साथ ही न्याय मिलने तक लड़ाई लड़ने का आह्वान किया गया।
नियामताबाद बीआरसी पर एबीआरसी को पत्रक भी सौंपा।
शिक्षामित्रों के
अलग अलग गुटों ने अलग अलग स्थानों पर सभा कर राष्ट्रीय अध्यापक प्रशिक्षण
परिषद का विरोध किया।
नियामताबाद संवाददाता के अनुसार उत्तर प्रदेशीय
प्राथमिक शिक्षा मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के मंडल अध्यक्ष विजय श्याम
तिवारी के नेतृत्व में शिक्षामित्रों ने बीआरसी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन
किया।
इस मौके पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने
फैसले में कहा है कि शिक्षक नियमावली में संशोधन का अधिकार केंद्र सरकार
के पास हैं।
ऐसे में अब शिक्षा मित्र प्रधानमंत्री से अपनी गुहार लगाएंगे।
निर्णय लिया गया कि वाराणसी में 18 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी
को शिक्षामित्र अपनी समस्या सुनाएंगे।
सभा के बाद जिले के शिक्षा मित्र
वाराणसी के लिए रवाना हुए। सभा में जिलाध्यक्ष श्याम सुंदर तिवारी, उमेश
दुबे, शिवेन्द्र मिश्र,महानंद, संजय, रमेश, सुमन, मिंता देवी, गोविंद,
उमेश सिंह, प्रद्युम्न आदि रहे।
इलिया संवाददाता के अनुसार
शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द किए जाने से नाराज शिक्षामित्रों का आंदोलन
दूसरे दिन भी जारी रहा। इसके चलते मंगलवार को भी कई विद्यालयों के ताले
नहीं खुले।
जो विद्यालय खुले थे, वहां शिक्षामित्र समयानुसार प्रात: आठ
बजे विद्यालय पहुंचे और उपस्थिति पंजिका पर हस्ताक्षर कर शिक्षण कार्य का
बहिष्कार किया। इसकी वजह से विद्यालयों में शिक्षण कार्य बाधित रहा।
विद्यालय में पहुंचे बच्चे इधर-उधर भटकते नजर आए।
प्राथमिक विद्यालय
बरियारपुर में दूसरे दिन मंगलवार को प्रधानाध्यापक के न आने से विद्यालय
के ताले नहीं खुले। पढ़ने पहुंचे बच्चों को मायूस होकर घर लौटना पड़ा।
शिक्षामित्रों के आंदोलन पर रहने के चलते विद्यालय में दो दिनों से ताला
लटका हुआ है।
इसी तरह प्राथमिक विद्यालय छीतमपुर, बेलासपुर सहित तमाम
विद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह शिक्षामित्रों के सहारे है। इसकी
वजह से इन विद्यालयों में शिक्षण कार्य ठप है।