पीडीडीयू नगर। धान के कटोरे में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनावी बिसात पर सियासत की शतरंज शुरू हो गई है। सपा और भाजपा निर्दलियों के नाव में सवार हो चुनावी वैतरणी पार करेंगे। अभी तक सपा ज्यादा बार इस पद पर काबिज रही हैं।
वाराणसी से अलग करके 1997 में जिला चंदौली का गठन किया गया था। इसके गठन के बाद से वाराणसी की सुषमा पटेल जिला पंचायत अध्यक्ष बनी। इसके बाद 2000 में हुए चुनाव में सपा की पूनम सोनकर निर्वाचित हुई। इसके बाद पूनम सोनकर चकिया विधान सभा क्षेत्र से विधायक चुनी गईं। 2005 में हुए जिला पंचायत चुनाव में सपा की अमलावती यादव जिले की प्रथम नागरिक बनी । 2010 में हुए चुनाव में छत्रबलि सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष निर्वाचित हुए। 2015 में सरिता सिंह ने विधायक सुशील सिंह की पत्नी किरण सिंह को हराकर जिले का प्रथम नागरिक बनीं। पहली बार सपा को मजबूत दलीय चुनौती मिल रही है। यह चुनाव दोनों दलों के रणनीतिकारों के लिए चुनौती से कम नहीं है। दोनों ही दल निर्दलीय रुप में जीते उम्मीदवारों पर अपना दांव खेल रहे हैं। सबसे अधिक जिला पंचायत सदस्य सपा के पास हैं । ऐसे में सपा अपने सदस्यों के बल पर जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर जीत का दावा ठोंक रही है। जबकि केंद्र और राज्य का सरकार संभाल रही बीजेपी भी जीत की बात कर रही है।