नौगढ़। क्षेत्र के बाघी गांव स्थित दुर्गा मंदिर पोखरे पर आयोजित श्रीराम कथा में रविवार को व्यास शालिनी त्रिपाठी ने भगवान भोलेनाथ के विवाह और तारकासुर के अत्याचार के वृतांत का वर्णन किया। कथा के दौरान हर-हर महादेव शंभू, काशी विश्वनाथ गंगे समेत अन्य भजनों पर श्रोता ताली बजाकर झूमते रहे। कथा का शुभारंभ विधायक कैलाश आचार्य ने किया।
व्यास शालिनी त्रिपाठी ने रामेश्वर का महत्व समझाते हुए कहा कि जो ईश्वर है, वही रामेश्वर है। उन्होंने माता पार्वती की कठोर तपस्या और भगवान शिव से उनके विवाह का प्रसंग सुनाया। सती के अंत के बाद हिमाचल प्रदेश में तारकासुर नामक राक्षस का जन्म होता है, जिसके अत्याचार से देवता घबराते हैं। उसी समय, राजा हिमाचल के घर में पुत्री के रूप में माता पार्वती अवतार लेती हैं। देवर्षि नारद राजा और रानी को सलाह देते हैं कि उनकी पुत्री घोर तपस्या कर भगवान शिव को प्राप्त करें। माता पार्वती के कठोर तप के बाद भगवान शिव सप्त ऋषियों को उनकी परीक्षा लेने के लिए भेजते हैं। माता पार्वती का अडिग और अटूट भाव देखकर सप्त ऋषि क्षमा मांगते हुए उन्हें वरदान देते हैं। इसके बाद देवताओं के आग्रह पर भगवान शिव, माता पार्वती से विवाह करते हैं। इस मौके पर कथा वाचिका सुनीति रामायणी, लालती देवी, शांति पांडेय, पंकज जायसवाल, राधे केसरी, अमरजीत जायसवाल आदि मौजूद रहे।