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पटाखा जलाने से बचें और प्रदूषण रहित दीवाली मनाएं

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चंदौली। दीपावली पर पटाखे छोड़ने से बचें । अभिभावकों को भी चाहिए कि वे अपने बच्चों को पटाखे न छोड़ने दें। पटखों के धुएं आंख के लिए और सांस के मरीजों के लिए बहुत ही खतरनाक है। साथ ही इससे प्रदूषण भी बढ़ता है। जो सबके लिए खतरनाक है। जब प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण को स्वच्छ बनाने की बात की जा रही तब तो ये पटाखे पर्यावरण के लिए और खतरनाक हो जाते हैं। जिससे हमारा स्वास्थ्य प्रभावित होता है। ये बातें पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय चिकित्सक सत्य प्रकाश ने कही।
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उन्होंने बताया कि सामान्यतया यह देखा गया है कि दीपावली के बाद सांस के मरीजों को परेशानी बढ़ जाती है। कई बार यह भी देखा गया है कि जो मरीज ठीक हो चुके होते हैं उन्हें भी परेशानी होने लगती है। ऐसे में पटाखे छोड़ने से बचना चाहिए। जिन घरों में ऐसे मरीज हों उनके यहां तो निश्चित रूप से सावधानी बरतनी चाहिए।
पटाखों में 3-4 फीट दूर से आग लगाएं। निकट से आग लगाने पर बारूद सीधे आंख में घुस जाता है। दीपावली की खुशी गम में बदल सकती है। पटाखों को किसी बंद डिब्बे या मटके में डाल कर नहीं जलाएं। यह बहुत ही खतरनाक होता है । ऊनी, सिल्क व पॉली या पॉली मिक्स कपड़े पहने कर पटाखे बिल्कुल ही न छोड़े। पटाखे जलाते समय सूती कपड़े ही पहनें। साथ में पानी की बाल्टी और बालू अवश्य रखें।अपने पास हमेशा प्राथमिक चिकित्सा के साधन रखें।
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आंखों में चिंगारी पड़े तो पानी डालें
पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय के स्पेशलिस्ट फिजिशियन डॉक्टर सत्य प्रकाश ने बताया कि पटाखा फोड़ते समय हाथ या शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो उसे तुरंत ठंडे पानी से धोएं और कुछ देर तक रखे रहें। अगर ज्यादा जला है तो तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में जाकर इलाज कराएं। अगर पटाखे से आंखों में चिंगारी गई है तो फौरन आंखों को पानी से धोएं और जल्द से जल्द अस्पताल जाएं। कॉनटैक्ट लेंस लगाते हैं तो दीपावली वाले दिन बिल्कुल न लगाएं और आंखों को पटाखों की तेज रोशनी से भी बचाएं। आंखों में चिंगारी या बारूद चला जाए तो उसे बिल्कुल न मलें, फौरन धो लें और चिकित्सक से संपर्क करें। पटाखे छूने के बाद आंखों को स्पर्श न करें।
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जरा सी लापरवाही नुकसान पहुंचा सकती है। हाथ जलने और आंखों के नुकसान की घटनाएं सबसे ज्यादा होती हैं। साथ ही इससे प्रदूषण फैलता है और तमाम तरह के स्वास्थ्य संबंधित रोग होते हैं। वहीं खासकर बच्चों को तो इस दिवाली दूर ही रखकर सावधानी से दिवाली मनाएं और प्रदूषण से वातावरण को बचाएं।
पटाखा जलाते लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। पटाखों में 3-4 फीट दूर से आग लगाएं। निकट से आग लगाने पर बारूद सीधे आंख में घुस जाता है। दीपावली की खुशी गम में बदल सकती है। पटाखों को किसी बंद डिब्बे या मटके में डाल कर नहीं जलाएं, ऐसे में कई बार मटके या डब्बे के टूटने से बच्चों के घायल होने की संभावना भी होती है। इससे बेहतर होगा की आप उनको अकेले पटाखे न जलाने दें। ऊनी सिल्क व कृतिम कपड़ों में आग बहुत जल्दी पकड़ लेती है। इससे बचने के लिए बेहतर होगा की पटाखे जलाते समय सूती कपड़े ही पहनें। जिस भी जगह आप पटाखे जला रहे हैं। वहां पानी से भरी बाल्टी जरूर रखें। ताकि गलती से कोई दुर्घटना हो जाए तो तुरंत पानी का प्रयोग किया जाए। अपने पास हमेशा फर्स्ट.एड किट तैयार रखें।
आवाज वाले पटाखे से बचें
आवाज वाले पटाखे जलाने से बचें। ये पटाखे हाथ में फट जाते हैं। कोई पटाखा फुस्स करके रह जाता है, तो हम उसे पैर या हाथ से कुरेदते हैं, जो खतरनाक है। पटाखों का बारूद आंख में जाने पर कुछ लोग घी का प्रयोग करते हैं। आंख में घी कतई नहीं डालें। घी तो आंख की अंदर की नमी सोखता है। फिर आंख सूख जाती है। अनार औऱ रॉकेट भी खतरनाक हैं। रॉकेट के बारूद को सीधे आंख में ही जाता है। अनार भी फट जाते हैं। यही हाल चकरी का है। इसलिए दूरी बनाकर रखें।
आंखों में चिंगारी पड़े तो पानी डालें
पंडित कमलापति त्रिपाठी संयुक्त जिला चिकित्सालय के स्पेशलिस्ट फिजिशियन डॉक्टर सत्य प्रकाश ने बताया कि पटाखा फोड़ते समय हाथ या शरीर का कोई हिस्सा जल जाए तो उसे तुरंत ठंडे पानी से धोएं और कुछ देर तक रखे रहें। अगर ज्यादा जला है तो तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में जाकर इलाज कराएं। अगर पटाखे से आंखों में चिंगारी गई है तो फौरन आंखों को पानी से धोएं और जल्द से जल्द अस्पताल जाएं। कॉनटैक्ट लेंस लगाते हैं तो दिवाली वाले दिन बिल्कुल न लगाएं और आंखों को पटाखों की तेज रोशनी से भी बचाएं। आंखों में चिंगारी या बारूद चला जाए तो उसे बिल्कुल न मलें, फौरन धो लें और चिकित्सक से संपर्क करें। पटाखे छूने के बाद अपनी आंखें न छुएं।
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