ईश्वर एक है और ईश्वर की आराधना करते हुए उसके अलौकिक स्वरूप का दर्शन
करना ही जीवन का मुख्य उद्देश्य है। जिस दिन लोग धर्म की सही परिभाषा जान
जाएंगे असहिष्णुता और सहिष्णुता का विवाद खत्म हो जाएगा। ये बातें सच
स्वरूप मां जसजीत जी ने शुक्रवार को अपने प्रवचन के पूर्व नगर के एक होटल
में पत्रकारों से बातचीत में कही। सभी विवादों के मूल में अज्ञानता है।
जसजीत जी ने कहा कि एक जनवरी 1993 को उन्हें ईश्वर का साक्षात्कार हुआ। तब
उन्हें पता चला कि पूरे ब्रह्मांड में जो कुछ हो रहा है, ईश्वर की मर्जी से
हो रहा है। दो वर्ष के बाद मुझे पता चला कि मुझे लोगों को सत्कर्म के पथ
पर चलने के लिए प्रेरित करने का आदेश हुआ है।
इसके बाद से वे उपदेश देने
में लग गईं। बताया कि श्रीकृष्ण ने गीता में कहा है कि सिर्फ एक ईश्वर की
पूजा करनी चाहिए। गुरुग्रंथ साहब में भी यही लिखा गया है।
संसार में हिंसा
पर उन्होंने कहा कि सभी विवादों के मूल में अज्ञानता है। जिस दिन अज्ञानता
समाप्त होगी, लोग सत्कर्म करने लगेंगे। उस दिन सब कुछ ठीक हो जाएगा। कहा कि
सभी जीवों में ईश्वर है और परमात्मा के निरंतर ध्यान से कोई भी परमात्मा
का साक्षात्कार कर सकता है।
माता के आशीर्वाद से जल को दवा के रूप में
परिवर्तित होने की बात पर कहा कि आस्था, गुरु दर्शन और विश्वास से कोई भी
काम असंभव नहीं है।