पीडीडीयू नगर। चंदौली के जंगलों में बने हजारों वर्ष पुराने शैलचित्र अब वर्षों तक संरक्षित और सुरक्षित रहेंगे। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली से आए कलाकारों की टीम इसे कैनवास पर उतार रही रही है। करीब एक सप्ताह से काम कर रहे कलाकारों ने कई शैलचित्रों को कैनवास पर उतारा है।
चंदौली के चकिया विकासखंड के घुरहूपुर गांव में पहाड़ की गुफाओं में शैलचित्र बने हैं। कहीं बुद्ध तो कहीं उस समय के देवी देवताओं के शैलचित्र यह बता रहे हैं कि कभी यह स्थान ऐतिहासिक दृष्टि से समृद्ध रहा है। शैलचित्रों के साथ हजारों वर्ष विरासत और इतिहास को संरक्षित और सुरक्षित करने के लिए इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, नई दिल्ली के शैलकला विभाग, डीएवी महाविद्यालय और बसंत महिला महाविद्यालय की ओर से जिले के शैलचित्रों पर अध्यनन और अभिलेखन का कार्य किया जा रहा है। टीम का उद्देश्य इन चित्रों को संरक्षित करना है। टीम ने 14 सितंबर से शैल चित्रों के अध्ययन का कार्य शुरू किया है।
इस टीम में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के दृश्य विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रमाकर पन्त, डॉ. दिलीप कुमार संत, डॉ. प्रवीण, डीएवी कालेज से डॉ. ओम प्रकाश, बंसत महिला महाविद्यालय से डॉ. राजीव जायसवाल, भूगर्भ विज्ञान, बीएचयू के प्रो. यू्के शुक्ला शामिल हैं। इसके अलावा चित्रकार निखिलेश प्रजापति और गौतम विश्वकर्मा भी इन चित्रों अनुकृति बना रहे हैं। टीम के सदस्यों ने बताया कि शुक्रवार को दोपहर तीन बजे से सैदुपूर के ग्राम घुरहूपूर में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। जिसके मुख्य अतिथि एसडीएम चकिया ज्वाला प्रसाद होंगे। इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को इसके लिए जागरूक किया जाएगा।