जीवन शैली और खानपान का तरीका बदलने से गर्भवती महिलाएं बीमारी के घेरे में आ जा रही हैं। जिले में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी एक बड़ी समस्या है।
सीएमओ संतोष कुमार चक के अनुसार जिले में हर सातवीं गर्भवती महिला एनीमिया से पीड़ित है। इनमें खून की कमी है। जिले में वर्तमान में 10,956 गर्भवती महिलाएं हैं। इनमें 1,425 महिलाएं हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (एचआरपी) की सूची में शामिल हैं। अधिकतर महिलाओं में हीमोग्लोबिन सात ग्राम है। डाॅक्टर का कहना है कि गर्भवती महिलाओं में हिमोग्लोबिन 10 ग्राम से अधिक होना चाहिए। इसका मुख्य कारण पौष्टिक आहार से दूरी है।
खानपान पर ध्यान नहीं देना, आयरन की गोलियां भी नियमित रूप से गर्भवती महिलाएं नहीं खाती हैं। इसके कारण शरीर में खून की कमी होती है। जन्म लेने वाला शिशु कमजोर पैदा होता है। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से बीते महीने गर्भवती महिलाओं की स्क्रीनिंग हुई थी। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर गौर करें, तो बीते 26 अप्रैल से 26 अगस्त तक कुल 20017 प्रसूताओं की जांच की गई।
इसमें 9061 प्रसूताओं का प्रसव हो चुका है। जबकि 1425 में हाई रिस्क प्रग्नेसी की श्रेणी में है। इनमें खून की कमी, कम वजन, लंबाई कम होना, गर्भ के निचले हिस्से पर बच्चे का होना आदि एचआरपी के श्रेणी में आते हैं।
यदि गर्भवती महिलाएं चाहे तो इससे बचा जा सकता है, सभी सीएचसी-पीएचसी पर निशुल्क हीमोग्लोबिन की जांच और दवाएं उपलब्ध हैं।