आदमचीनी की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि आदमचीनी चावल की महक इसे अन्य प्रजातियों से अलग बनाती है। प्राकृतिक रूप से सुगंधित यह चावल कम लागत में अच्छी पैदावार देता है, जिससे खेती की लागत और लाभ का संतुलन भी मजबूत रहता है।
बताया कि विदेशों में प्रीमियम क्वालिटी के भारतीय चावलों की मांग लगातार बढ़ रही है और आदमचीनी चावल इस सूची में तेजी से जगह बना रहा है। अजय सिंह का मानना है कि यदि इस चावल का व्यवस्थित ब्रांडिंग, पैकिंग और क्वालिटी सर्टिफिकेशन किया जाए तो आने वाले वर्षों में यह अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की तरह पहचान हासिल कर सकता है।
इस वर्ष 50 एकड़ में हुई है आदमचीनी की खेती
आदमचीनी चावल की खेती की ओर किसानों का रुझान तेजी से बढ़ा है। इस वर्ष करीब 50 एकड़ में आदमचीनी की खेती हुई है जबकि पिछले वर्ष 40 एकड़ में ही खेती हुई थी। अब बाजार और अच्छी कीमत मिलने से खेती का रकबा बढ़ने का उम्मीद है।
चंदौली में जीआई टैग प्राप्त आदमचीनी चावल को वैश्विक बाजार मिलने से किसानों में हर्ष है। चावल के निर्यात के लिए छूट देने की कवायद चल रही है। -सिद्धार्थ यादव, उपायुक्त उद्योग