कंदवा। क्षेत्र में बुधवार की दोपहर आई तेज आंधी-पानी के साथ गिरे ओले ने जमकर कहर बरपाया। इस दौरान कई झोपड़ियां, टीन शेड, सीमेंट शेड उड़ गए और खलिहान में रखा अनाज व भूसा भीगकर बर्बाद हो गया। आंधी व बारिश के कारण बिजली व्यवस्था भी चरमरा गई।
दिन के करीब बारह बजे के आसपास आधे घंटे तक तेज हवा के साथ हुई बारिश के दौरान ओले भी गिरे। आंधी से जहां दर्जनों टिन व सीमेंट शेड और झोपड़ी आंधी मे उड़ गए वहीं बारिश से खलिहान मे रखा अनाज और भूसा भी भीग कर बर्बाद हो गया। निकासी अवरुद्ध होने से कुछ जगहों पर जलभराव की समस्या बन गई। करीब आधा घंटा बाद जब मौसम सामान्य हुआ तब जाकर लोगों ने राहत की सांस ली। आंधी-तूफान से अरंगी गांव निवासी राजकुमार उर्फ बसंतु सिंह के छत का बारजा भी टूटकर गिर गया। हांलाकि इससे कोई हताहत नहीं हुआ। वहीं अंतू साह व कल्लू के घरों पर लगा टिन शेड उड़ गया और सद्दाम की गुमटी ध्वस्त हो गई। इसके अलावा रामू सिंह व पुट्टू सिह सहित अन्य किसानों का खलिहान में रखा गेहूं बारिश में भीगकर बर्बाद हो गया। कई जगह पेड़ों की टहनियां भी टूटकर रास्तों पर गिर गईं जिन्हें हटाने में ग्रामीण देर तक जुटे रहे।
शाम होते ही छाए बादल, हवा चली
पीडीडीयू नगर। पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर में भी सुबह से ही धूप छांव का खेल चलता रहा। शाम होते ही आसमान में बादल छा गए। हवाएं भी चली हालांकि देर रात तक बारिश नहीं हुई। बारिश की आशंका से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई। आसमान में बादल छाने से तापमान में भी गिरावट आई और गर्मी से राहत मिली।
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ठप हुई 120 गांवों की बिजली
तेज आंधी-पानी के साथ गिरे ओलों से दोपहर के साढ़े 12 बजे के करीब अमड़ा विद्युत उपकेंद्र से संचालित छह फीडरों से जुड़े 120 गांवों की बिजली ठप हो गई। साढ़े छह घंटे बाद शाम के करीब साढ़े छह बजे पांच फीडरों की विद्युत आपूर्ति तो शुरू हो गई लेकिन असना फीडर से जुड़े 25 गांवों की विद्युत आपूर्ति शुरू नहीं हो सकी। इससे असना, कोरमी, जलालपुर, तलासपुर, कंजेहरा आदि गांवों में अंधेरा पसरा हुआ था। विद्युत कर्मी गड़बड़ी दूर करने में जुटे हुए थे।