नियामताबाद। मानदेय में वृद्धि की मांग को लेकर पर्यवेक्षकों ने रविवार को आयोजित पल्स पोलियो कार्यक्रम का बहिष्कार किया। ग्रामीण अंचलों में पर्यवेक्षकों और वेक्सीनेटरों की हड़ताल के चलते पोलियो कार्यक्रम प्रभावित रहा। वहीं स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि इस हड़ताल का अभियान पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय कार्यक्रम पल्स पोलियो अभियान से जुड़े सुपरवाईजरों व ब्लाक मानिटरों के तय मानदेय में अब तक कोई वृद्धि नहीं हुई है। यदि सरकार ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया तो वे इसी तरह कार्य बहिष्कार करते रहेंगे। रविवार सुबह सिंघीताली, पटनवा, गोपलापुर, हमीदपुर, कबीरपुर, कमलापुर, मन्नापुर, जीवनाथपुर, एकौनी, कुंडलियां, सुरौली, गंगेहरा, गोधना, रेमां, कठौड़ी, धपरी, नियामताबाद आदि गांवों से मध्याह्न तक जब पोलियोरोधी दवा नहीं पहुंची, तब प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. पीके चतुर्वेदी ने अपने वाहन से बूथों तक दवा पहुंचाई। बारह बजे के बाद बूथों पर दवा उपलब्ध होने के बाद एएनएम, आशा और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने दवा पिलाने का काम शुरू किया। शाम तक 25 हजार 775 बच्चों के पोलियो रोधी दवा पीने का स्वास्थ्य विभाग दावा कर रहा है। वहीं ब्लाक मानीटर वीरेंद्र सिंह ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट फर्जी है। प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. पीके चतुर्वेदी ने कहा कि नियामताबाद में हड़ताल का कोई असर नहीं पड़ा है सभी बच्चों ने दवा पी है।