चकिया। टेंगरा मोड़ वाया चकिया वाया मद्धूपुर स्टेट हाइवे के निर्माण से सैकड़ों वर्ष पुराने फलदार तथा छायादार वृक्षों की शामत आ गई है। इस मार्ग के चौड़ीकरण होने से सैकड़ों पुराने पेड़ों का कटना तय हो गया है। इन पेड़ों की सूची बनाकर वन विभाग ने उसे उप्र वन निगम के हवाले कर दिया है। अब वन निगम इन पेड़ों को कटवाने का काम करेगा। सैकड़ों पुराने पेड़ों के कटने से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होना तय माना जा रहा है एवं पर्यावरण विद् भी इसे स्वीकार करते हैं। वहीं वन विभाग के एसडीओ एसके श्रीवास्तव ने कहा कि इन पेड़ों की जगह वन विभाग नया पौधरोपण कराएगा।
टेंगरा मोड़ से जीवनाथपुर, कंचनपुर होते हुए सिकंदरपुर, चकिया, नौगढ़ से मद्धूपुर (मिर्जापुर) को जोड़ने एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्र को सीधे वाराणसी तक सुगम यातायात मुहैया कराने के लिए स्टेट हाइवे के निर्माण का कार्य प्रगति पर है। लेकिन इस प्रगति के साथ ही मार्ग के चौड़ा होने के कारण पुराने पेड़ों का सर्वे करने के बाद काशी वन्य जीव प्रभाग के राजपथ रेंजर नंदलाल कुशवाहा की माने तो वन क्षेत्र के आरंभ होने के पूर्व कुल 272 पुराने पेड़ों को काटने की सूची तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त चकिया, चंद्रप्रभा, नौगढ़, मझगांई, जयमोहनी रेंजो में स्थित सड़क के किनारे के पेड़ भी कटने हैं। उन्होंने इस सड़क के निर्माण में सैकड़ों पेड़ कटने की संभावना से इंकार नहीं किया है। राजपथ रेंजर के मुताबिक कटने वाले पेड़ों की सूची में पुराने आम, पीपल, महुआ एवं इमारती वृक्ष, शीशम के पेड़ सम्मिलित है।
पर्यावरण विशेषज्ञ वृक्ष बंधु परशुराम सिंह की माने तो इन इमारती, छायादार एवं फलदार वृक्षों के कटने से पर्यावरण संतुलन पर विपरित प्रभाव पड़ेगा तथा घने वृक्षों की कमी होगी। वहीं वन विभाग के एसडीओ एसके श्रीवास्तव ने कहा कि जितने पेड़ों की कटान होगी उतने पेड़ों के पौधों का रोपण विभग कराएगा एवं यह पौधरोपण व्यवस्थित होगा। उन्होने कहा कि पेड़ों की कीमत की भरपाई सड़क निर्माण एजेंसी करेगी।