सकलडीहा। उपभोक्ताओं को नया कार्ड कब मिलेगा, इसका जवाब न तो आपूर्ति विभाग के पास है और न ही कोटेदार के पास। आपूर्ति विभाग के अनुसार ग्राम पंचायत अधिकारियों की लापरवाही से ही पुराने कार्डों की वैधता तिथि बढ़ाना मजबूरी हो गई है। जबकि ग्रामीणों के अनुसार इसमें खेल किया जा रहा है। क्योंकि कोटेदार चुनिंदा लोगों के ही कार्ड बनवा रहे हैं।
दरअसल स्थानीय विकास खंड के कुल 87 गांवों में लगभग पैंसठ हजार कार्ड धारक हैं। इनमें से एपीएल के 48 हजार 440, बीपीएल के 10 हजार 926 और अंत्योदय के 5 हजार 253 राशन कार्ड धारक हैं। यह आंकड़ा आपूर्ति विभाग के अनुसार है। इस आंकडे़ का अगर वर्तमान कार्ड धारकों से मिलान किया जाए तो असलियत सामने आ जाएगी। क्योंकि वर्ष 2005 में जितने भी नए राशन कार्ड बने थे। उनका आंकड़ा तो विभाग के पास मौजूद है लेकिन इसके बाद विभाग से चोरी छिपे बने राशन कार्डो का सही आंकड़ा किसी के पास मौजूद नहीं है। जब-जब नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो कोई न कोई अड़चन पैदा हो जाती है। वर्ष 2005 में बने राशन कार्ड 2010 तक ही मान्य थे। लेकिन उन पुराने कार्ड पर ही लोगों को लाभ दिया जा रहा है। शासन से यह भी कहा गया था कि जनवरी 2013 से नए कार्डों की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। वर्ष 2013 में प्रक्रिया शुरू की गई। विभाग ने प्रशासन व अन्य सरकारी विभागों के कर्मचारियाें की मदद से नए फार्म भरवाने शुरू किए । इस कार्य में आंगनबाड़ी सेविकाओं, लेखपाल व ग्राम पंचायत अधिकारी की डृयूटी लगाई गई थी। लेकिन राशन कार्डधारकों के फार्म भरने के बाद ब्लाक मुख्यालय पर रखा गया तो ग्रामीणों द्वारा आरोप लगाया गया था कि कोटेदारों द्वारा सिर्फ चुनिंदा लोगों के कार्ड बनाए जा रहे हैं। कोटेदार उन्हीं लोगों को फार्म बांट रहे हैं, जिनका पहले से राशनकार्ड बना हुआ है। उधर आपूर्ति निरीक्षक दीपक सिंह ने बताया कि बीपीएल व अंत्योदय राशन कार्डधारकों के सत्यापन का जिम्मा ग्राम पंचायत अधिकारियों को सौंपा गया है। कोटेदारों को सत्यापन कराने के लिए सेक्रेटरियों के घरों व दफ्तरों का चक्कर काटना पड़ा रहा है। यही कार्ड बनने में देरी का मूल कारण है।
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वर्तमान में बंटे फार्मों में भी है कमी
जो फार्म वर्तमान में कोटेदारों के माध्यम से जनता को दिए जा रहे हैं। उनमें भी कुछ कमियां हैं। जैसे फार्म में कोटेदार का नाम और कार्डधारक का नाम तो मौजूद है पर कार्डधारक किस मोहल्ले का है यह नहीं दर्शाया गया है। इसके अलावा जाति का कॉलम भी नहीं दिया गया है। जबकि विभाग को मालूम है कि एक कोटेदार के पास कई-कई मोहल्लों के लोग हैं और एक ही नाम के कई लोग हैं।
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दस रुपये तक में बिक रहे फार्म
सूत्र बताते हैं कि हर बार राशन कार्डों के फार्म के लिए विभाग शासन से फंड की मांग करता है और फार्म छपवाने के लिए जितना फंड आता है उसमें कुछ हजार फार्म छपवाकर बांटे जाते हैं। बाकी जिम्मेदारी कोटेदारों पर डाल दी जाती है और बचे फंड की बंदरबांट कर ली जाती है। वहीं मौके का फायदा उठाकर कोटेदार भी फार्म को दो रुपये से दस रुपये में बेच रहे हैं।
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‘नए राशनकार्ड बनाने पर रोक नहीं लगी है। एपीएल कार्ड बनाए जा रहे हैं। बीपीएल और अंत्योदय कार्डों पर अवश्य रोक लगाई गई है। इन कार्डों के निरस्त होने पर ही उसकी जगह दूसरा राशन कार्ड जारी किया जाएगा।’-आरएन चतुर्वेदी, जिला आपूर्ति अधिकारी।