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देश में समन्वित चिकित्सा नीति की जरूरत

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कहने को तो चिकित्सकों को धरती पर भगवान का रूप कहा जाता है लेकिन सरकारी नीतियों की वजह से चिकित्सक आज सबसे असुरक्षित हैं। देश में स्वास्थ्य नीति बनाई जाती है, उसमें चिकित्सकों के सुझाव नहीं लिए जाते हैं। यही कारण है कि देश में आज भी अच्छी चिकित्सा प्रणाली विकसित नहीं हो पाई है और सरकारी अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं का भी अभाव है। देश में अलग-अलग कई चिकित्सा पद्धतियां हैं लेकिन इनमें समन्वय न होने की वजह से भी समस्या आ रही है। अमर उजाला ब्यूरो कार्यालय में सोमवार को आयोजित चिकित्सकों से संवाद कार्यक्रम में चिकित्सकों ने कहा कि सरकारें आश्वासन देती हैं लेकिन पूरा नहीं कर रही है। यदि इमानदारी से काम हो तो चिकित्सा व्यवस्था सुधर जाएगी।
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पीडीडीय नगर। जिले में सरकारी अस्पतालों में किड़नी, न्यूरो के चिकित्सकों की कमी है। ब्लड बैंक नहीं है। इसकी व्यवस्था करने की जरूरत है। ताकि यहां के मरीजों को भटकना नहीं पड़े। वरिष्ठ फीजिशियन डॉ. डीपी सिंह ने कहा कि देश में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी है। देश के सभी नागरिक को अच्छी और सस्ती चिकित्सा का लाभ मिलना चाहिए लेकिन ऐसा नहीं है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि लोग लालच में गलत व्यक्ति को वोट देते हैं। इससे सही प्रतिनिधि का चयन नहीं हो पाता हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना है तो पहले लोगों को स्वस्थ बनाना होगा। जिले में स्टेडियम की व्यवस्था नहीं है। ब्लड बैंक की बेहतर व्यवस्था होनी चाहिए। डॉ. बुद्धदेव बिशी ने कहा कि देश को स्वस्थ बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है। डॉ. एके सिंह ने कहा कि आज पालिटिक्स इंडस्ट्री बन गई है। जनप्रतिनिधियों के पास आम लोगों के लिए वक्त ही नहीं है। कहा कि देश में एलोपैथ, आयुर्वेद, होम्योपैथ सहित अन्य कई चिकित्सा पद्धतियां है लेकिन इनमें समन्वय ही नहीं है। जब तक एकीकृत समन्वय चिकित्सा पद्धति लागू नहीं होगी, व्यवस्था परिवर्तन नहीं होगा। डॉ. ओपी सिंह ने कहा कि चिकित्सा विभाग में भ्रष्टाचार का बोल बाला है। इस पर रोक लगनी चाहिए। देश में चिकित्सकों की कमी है। बाल रोड विशेषज्ञ डॉ. उमाशरण पांडेय ने कहा कि चिकित्सा व्यवसाय सबसे पवित्र व्यवसाय है। देश में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि सभी को क्वालिटी चिकित्सा मिल सके। आयुष्मान योजना लागू की गई लेकिन इसमें सिर्फ एडमिट होने पर मुफ्त चिकित्सा की व्यवस्था है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। डॉ. आरके गुप्ता ने चिकित्सकों की सुरक्षा को महत्वपूूर्ण बताया।
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